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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह त्वरित कार्य बल (आरएएफ) के 27वें स्थापना दिवस पर आयोजित परेड में शामिल होने के लिए अहमदाबाद पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और सलामी दी। RAF के जवानों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि ‘आज ही के दिन 1992 में आरएएफ की स्थापना की गई थी। इतने कम समय के अंदर आरएएफ ने देश और दुनिया दोनों मानकों में अपनी विश्वसनियता बनाने में बहुत बड़ी सफलता हासिल की है।

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उन्होंने कहा, कई जगह जहां दंगे और उपद्रव होते हैं वहां RAF पहुंचने की सूचना मात्र से ही दंगाइयों का बिखरना शुरू होना देश की जनता ने देखा है। कई जगह RAF की उपस्थिति के कारण दंगे होने की शुरुआत ही नहीं हो पाती है सीआरपीएफ 1949 में अस्तित्व में आया, और इसके जवानों ने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से कभी पीछे नहीं हटे। लद्दाख हॉटस्प्रिंग के दौरान लड़ाई जिसमें 10 सीआरपीएफ जवानों ने चीनी सैनिकों के स्वचालित हथियारों से लड़ाई लड़ी, सीआरपीएफ का एक बहादुर उदाहरण है।

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अमित शाह ने कहा कि, आज देशभर के अंदर पुलिस बल, अद्धसैनिक पुलिस बल सभी के 34 हजार से ज्यादा जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है उन सभी श्रद्धांजलि देता हूं। उन्होंने कहा, आरएएफ की कुल 125 महिला कैडेटों ने लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भाग लिया था। यह पहली बार था जब किसी महिला बटालियन ने भारत के संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भाग लिया था। RAF दंगा को तो नियंत्रित करती ही है साथ ही कई स्थानों पर दंगा न हो तो पहले से ही उपलब्ध रहती है। प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए भी RAF ध्रुत गति से काम में लग जाती है।

गृहमंत्री ने कहा कि आरएएफ की 27 वीं वर्षगांठ पर, मैं कहना चाहूंगा कि इसने देश के लोगों के साथ-साथ सरकार के सभी लक्ष्यों और आशाओं को पूरा किया है। मैं आरएएफ के हर जवान को बधाई देना चाहता हूं। वहीं उन्हेंने कहा, नरेंद्र मोदी 35,000 जवानों को असली श्रद्धांजलि दी है जो हमने कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटाकर खो दिया है। इसने शांति की एक निरंतर स्थिति बनाई है।

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