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अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। मध्यस्थता के माध्यम से कोई आसान हल निकलने का प्रयास विफल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ कर रही है। इस पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं।

इसी बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला सुनाए, लेकिन सरकार के पास संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत राष्ट्रीयकरण का ब्रह्मास्त्र है। अनुच्छेद 300-ए के तहत केस में जीतने वाले को जमीन नहीं, मुआवजा देने का अधिकार है। अयोध्या की कुल 67.703 एकड़ जमीन में से सुप्रीम कोर्ट में केवल 0.313 एकड़ क्षेत्र ही विवादित है।

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की 2.77 एकड़ भूमि विवाद से संबंधित मामले में कुल 14 अपीलें दायर की गई हैं। ये सभी अपीलें 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं।

बता दें कि 6 अगस्त से शुरू हुई रोजाना सुनवाई का आज तीसरा दिन है। पहले और दूसरे दिन सर्वोच्च अदालत में निर्मोही अखाड़ा ने अपनी बात रखी और बुधवार शाम को रामलला के वकीलों ने दलील रखना शुरू की थी। मामले की सुनवाई के दौरान जजों ने वकीलों ने तीखे सवाल पूछे जो चर्चा का विषय रहे।

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