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आज देश की हर बेटी की मां सिर्फ यही दुआ कर रही होगी कि “तू ना आना इस देश मेरी लाडो”। जम्मू कश्मीर से सामने आए कठुआ गैंगरेप केस ने हर बेटी को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई बेटी होना जघन्य अपराध है और आज हर लड़की के मन में ये सवाल है कि क्या आदमी की हवस इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि उसे अपनी हवस पूरी करने के लिए किसी मासूम की ज़िन्दगी बर्बाद करने के लिए दो बार सोचने तक की जरुरत नहीं पड़ती है। ऐसे बहुत सारें सवाल है जो आज देश की माएं, बेटियां और बहनें सोच रही है, हालांकि उनकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। फिलहाल पिछले 4 महीने से मामले को रफा दफा कर रही जम्मू कश्मीर पुलिस ने आठ साल की बच्ची से गैंगरेप और हत्या के मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।

धर्म बना मासूम का दुश्मन

ये मासूम सा चेहरा, जिसे देखकर किसी को भी प्यार हो जाए, उसकी इज्जत के साथ सिर्फ धर्म के नाम पर खिलवाड़ किया गया। चार्जशीट के मुताबिक़, तहसील में हिंदू समुदाय के लोगों का मानना था कि बकरवाल समुदाय जिले में गाय और नशीले पदार्थों की तस्करी करने में लगा हैं। इससे उनके समुदाय के लोग नशे के शिकार हो रहे हैं। इसके परिणामस्वरुप आरोपी संजी राम जो कि दोनों समुदाय के बीच समझौते के खिलाफ था, वह हिन्दू समुदाय के लोगों को बकरवाल समुदाय को भगाने के लिए रणनीति तैयार करने के लिए उकसाता था।

जिसके बाद साजिशकर्ता संजी राम के साथ विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया, सुरेंद्र वर्मा, उसके दोस्त परवेश कुमार उर्फ मन्नू, भतीजा राम किशोर और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा उर्फ शम्मा ने कथित रूप से इस घिनौने कृत्य को करने की रणनीति तैयार की और अंजाम दिया। क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक बच्ची को कठुआ जिले में एक मंदिर में ले जाया गया और वहां उसे नशा देकर उसके साथ एक सप्ताह तक कई बार रेप किया गया। यही नहीं बच्ची को मारने से पहले भी उसके साथ रेप हुआ।

ऐसे किया गया अपहरण

दरअसल, मासूम आसिफा जब 10 जनवरी को जानवरों के लिए घास लेने जंगल गई थी, तब वहां से नहीं लौटी तो उसके पिता को चिंता हुई, जिसके बाद 12 जनवरी को मृत बच्ची के पिता मोहम्मद यूसुफ ने हीरानगर थाने में बच्ची की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच के मुताबिक़, संजी राम के कहने पर उसके नाबालिग भतीजे ने लड़की को देखा और जंगल में जानवरों के होने की बात बताई। इसी बहाने वह उसे थोड़ी दूर तक ले गया। इसके बाद उसने लड़की की गर्दन पर हमला कर जमीन पर गिरा दिया। इस दौरान बच्ची के साथ नाबालिग भतीजे और उसके साथी मन्नू ने रेप किया। रेप करने के बाद दोनों उसे मंदिर में ले गए और वहां प्रार्थना कक्ष में उसे बंधक बनाकर रखा।

रेप के लिए आमंत्रित किया

चार्जशीट के मुताबिक, जब सभी आरोपी मासूम से बारी-बारी से रेप कर रहे थे, तब आरोपी विशाल ने 11 जनवरी को मेरठ में पढ़ने वाले अपने चचेरे भाई को फोन करके कहा, कि अगर वह अपनी हवस मिटाना चाहता है तो आ जाए। 12 जनवरी को विशाल वहां पहुंचा और फिर सुबह 8.30 बजे मंदिर गए। इसके बाद विशाल ने भूखे पेट बंधक बनी लड़की को नशे की तीन गोलियां दीं।

रुको मुझे भी हवस मिटाने दो: पुलिस अधिकारी

चार्जशीट के मुताबिक बच्ची के साथ लगातार एक सफ्ताह तक कई बार बलात्कार किया गया। सिर्फ इतना ही नहीं बच्ची को मारने से ठीक पहले 13 जनवरी को एक पुलिस अधिकारी ने कहां, रूको थोड़ी देर पहले मुझे एक अंतिम बार हवस मिटाने दो। इसके बाद दूसरों ने भी फिर से बच्ची का रेप किया। उसके बाद बच्ची का गला घोटकर आरोपियों ने 15 जनवरी को मासूम के शव को जंगल में फेंक दिया। जहां से 17 जनवरी को बच्ची का शव बरामद किया गया।

पुलिस ने ली घूस

चार्जशीट में कहा गया है कि मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने रेप के आरोपी नाबालिग की मां से डेढ़ लाख रुपए उसे बचाने के नाम पर घूस लिए।

इन पर केस
आरोपियों में मांजी राम, उसका बेटा विशाल, सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, दो विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, हेट कॉन्स्टेबल तिलक राज और स्थानीय नागरिक प्रवेश कुमार शामिल हैं। इनके खिलाफ रेप, मर्डर और साक्ष्यों को छिपाने की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

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