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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 और 12 अक्टूबर को दो दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले चीन ने कश्मीर मसले पर अपना रुख बदल लिया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग के मुताबिक, इस मसले को द्विपक्षीय तरीके से हल किया जाना चाहिए। इससे पहले चीन ने इस मसले में संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के मुताबिक मुद्दे को हल किए जाने की बात की थी।

पत्रकारों ने सवाल पूछा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का चीन दौरा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे के ठीक पहले हुआ है। क्या इन दोनों का आपस में कोई ताल्लुक है?

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंगु शुआंग ने कहा, “कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख़ में कोई परिवर्तन नहीं आया है। हमारा रुख़ बिल्कुल स्पष्ट है। हमारा भारत और पाकिस्तान से कहना है कि वो कश्मीर के साथ बाक़ी अन्य विवादों को द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिए सुलझाए। इससे दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ेगा और उनके रिश्ते सुधरेंगे। इससे भारत और पाकिस्तान दोनों की ही समस्याएं हल होंगी।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा- भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय आदान-प्रदान की प्रथा रही है। चीन और भारत दोनों ही मुख्य विकासशील देश हैं और उभरते हुए बाजार हैं। हमने अपने आपसी मतभेदों को सुलझाते हुए सहयोग को बढ़ावा दिया है और हम अपनी द्विपक्षीय बातचीत को अगले चरण तक ले जा रहे हैं। हम इसके लिए अच्छा वातावरण बना रहे हैं।

जिनपिंग के भारत दौरे से ठीक पहले इमरान खान ने बीजिंग का दौरा किया था। बावजूद इसके कश्मीर पर चीन का ताजा बयान पाकिस्तान के लिए झटका है। चीन इससे पहले कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा था। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच महाबलीपुरम में दूसरी अनौपचारिक बैठक होने वाली है। महाबलीपुरम का चीन से करीब 2 हजार साल पुराना संबंध है। इस वजह से इस बैठक को ऐतिहासिक बल मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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