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सुप्रीम कोर्ट के बाहर वकील और महिला कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। जिसेक कारण न्यायालय परिसर के बाहर धारा 144 लागू कर दी गई है। यह प्रदर्शन CJI रंजन गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोप से निपटने के लिए अपनाए गए तरीके के खिलाफ किया जा रहा है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की इनहाउस जांच कमेटी ने CJI रंजन गोगोई को यौन उत्पीड़न के आरोपों से क्लीन चिट दे दी थी। इसके साथ ही आरोप लगाने वाली महिला की शिकायत भी खारिज कर दी थी। कमेटी ने कहा था कि कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी के आरोपों में दम नहीं है।

तीन जजों वाली इनहाउस कमेटी ने एक स्वर में CJI रंजन गोगोई को निर्दोंष पाया और शिकायतकर्ता की शिकायत को खारिज कर दिया। पैनल ने अपने निष्कर्ष में कहा कि 19 अप्रैल से पहले जब शिकायतकर्ता ने 22 जजों को लिखा तो यौन शोषण या पीड़ित किए जाने संबंधी आरोप नहीं लगाए जबकि दिसंबर 2018 में अनुशासनात्मक कार्रवाई को चुनौती देते वक्त उनके पास ये मौका था।

गौरतलब है कि एक पूर्व महिला कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद गठित की गई तीन सदस्यीय इन हाउस समिति के जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी के पैनल ने जस्टिस रंजन गोगोई को निर्दोंष पाया और शिकायतकर्ता की शिकायत को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि इन हाउस पैनल की जांच के तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के 2003 के नियमों के तहत सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

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