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New Delhi: उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत इन दिनों मुसीबतों में हैं। सोमवार को नैनीताल उच्च न्यायालय ने 2016 के स्टिंग वीडियो मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो को हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जांच शुरू कर सकती है लेकिन कोर्ट के अंतिम फैसले तक रावत को गिरफ्तार नहीं कर सकती।

आपको बता दें कि इससे पहले रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कथित रूप से विधायकों की खरीद-फरोख्त से संबंधित स्टिंग मामले में उचित न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया। रावत ने रविवार को ट्वीट्स की एक श्रृंखला में सीबीआई पर ये आरोप लगाया।

रावत ने ट्विटर पर कहा, “सीबीआई मुझे खत्म करना चाहती है। वे मुझे न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दोषी घोषित करना चाहते हैं और मुझे जेल भेजना चाहते हैं। मैंने अदालत में अपील की है और मुझे आपकी सहानुभूति और समर्थन की जरूरत है।”

रावत ने शनिवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि देश में असंतोष फैलाने वाली आवाज़ों को चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार उन सभी को कमजोर करना चाहती है जो राज्य स्तर पर शक्तिशाली हैं। उन्हें बदनाम करके या आर्थिक रूप से बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है।”

रावत को कथित तौर पर एक वीडियो में आरोपी पाया गया है, जो 2016 में सामने आया था। इस वीडियो में नौ बागी विधायकों के साथ बातचीत करके उन्हें कांग्रेस में शामिल करने की बात सामने आई थी। मामला नैनीताल हाईकोर्ट में है और सुनवाई की अगली तारीख 1 अक्टूबर है। इस महीने की शुरुआत में, सीबीआई ने अदालत से कहा था कि वह मामले में रावत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करेगी।

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