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देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि लोगों का सांस लेना भी दुभर हो गया है। इसका सबसे ज्यादा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अब प्रदूषण को रोकने के लिए नई पहल की जा रही है। प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए डीटीसी और क्लस्टर बसें जल्द ही हाइड्रोजन सीएनजी (हाइड्रोजन कम्प्रैस्ड नेचुरल गैस) से भी दौड़ेंगी।

वर्तमान में डीटीसी और क्लस्टर बसें सीएनजी से चलती हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत दिल्ली में बसों में एचसीएनजी का प्रयोग पहली बार होगा।

सूत्रों के मुताबिक, बसों में हाइड्रोजन सीएनजी के प्रयोग के लिए सरकार की ओर से अन्य एजेंसियों के सहयोग से जल्द ही पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसके अंतर्गत एचसीएनजी के प्रयोग के पहले चरण में क्लस्टर की 50 बसों को 6 महीने तक दिल्ली की सड़कों पर चलाया जाएगा और इस प्रोजेक्ट की निगरानी ईपीसीए की ओर से की जाएगी।

वहीं दिल्ली में पहला हाइड्रोजन सीएनजी स्टेशन भी बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। यह हाइड्रोजन सीएनजी स्टेशन राजघाट स्थित क्लस्टर डिपो में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से बनाया जाएगा।

क्लस्टर बसों में हाइड्रोजन सीएनजी का परीक्षण सफल रहने के बाद डीटीसी और क्लस्टर की अन्य बसों में भी हाइड्रोजन सीएनजी ईंधन का प्रयोग किया जा सकता है। इस नए वाहन ईंधन के प्रयोग से यह पता लगाया जाएगा कि प्रदूषण के स्तर को कम करने में कितनी मदद मिल सकती है और यह सीएनजी से कितना बेहतर साबित हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ट्रायल के तौर पर बसों में 6 महीने तक प्रयोग की जाने वाली हाइड्रोजन सीएनजी की रिपोर्ट की समीक्षा करेगा। यदि परिणाम बेहतर साबित हुए तो हाइड्रोजन सीएनजी का बतौर ईंधन अन्य वाहनों में प्रयोग शुरू हो सकता है।

 

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