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कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्की और मलेशिया को भारत बड़ा झटका देने की तैयारी कर रहा है। दोनों देशों से सामानों के आयात को सीमित करने के लिए मोदी सरकार टैरिफ तथा गैर-टैरिफ दोनों ही विकल्पों पर विचार कर रही है। सरकार के इस कदम से दोनों देशों को काफी आर्थिक मार पड़ेगी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विकल्पों में कठोर क्वालिटी टेस्ट और मौजूदा टैक्स के अलावा एक सेफगार्ड टैक्स लगाना शामिल है।

31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में दोनों देशों के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार कुल व्यापार का महज 2.9% रहा है। इस बीच, भारत ने मलयेशिया को जोर का झटका दिया है। एक प्रभावी इंडियन प्रोसेसर्स ग्रुप ने अपने सदस्यों से कहा है कि वो मलयेशिया से पॉम ऑयल की खरीदारी तत्काल बंद कर दें। भारत ने अपने घरेलू उद्योग की सुरक्षा का हवाला देते हुए, पिछले महीने मलयेशिया से आयातित होने वाले रिफाइंड पॉम ऑयल पर छह महीने के लिए कस्टम ड्यूटी में 5% की बढ़ोतरी की थी। अब इस ड्यूटी में और इजाफा किया जा सकता है।

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन द्वारा कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ की गई बयानबाजी को लेकर तुर्की से अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए पहले से तय अंकारा के दौरे को रद्द कर दिया। तुर्की से भारत मिनरल फ्यूल्स और ऑयइल, न्यूक्लियर रिक्टर्स और नमक का आयात करता है। भारत ने भी तुर्की को रक्षा संबंधी निर्यात में कटौती करनी शुरू कर दी है।

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