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जम्मू कश्मीर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग कर दी है। इसके साथ ही जल्द चुनाव का रास्ता साफ हो गया। यह कार्रवाई तब हुई, जब बुधवार को विभिन्न पार्टियों की ओर से सरकार बनाने की खबरे मीडिया में चल रही है। इसके साथ ही घाटी में पीडीपी,नेशनल कान्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन की पहल को भी बड़ा झटका लगा है।

राज्यपाल ने अपने आदेश में विधानसभा भंग करने के पीछे चार प्रमुख कारण बताए हैं। पहला कारण, विरोधी राजनीतिक विचारधारा वाले दलों के गठबंधन से स्थाई सरकार बनने के आसार कम हैं। दूसरा कारण, सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका है।

तीसरा कारण, खंडित जनादेश से स्थाई सरकार बनाना संभव नहीं है, ऐसी पार्टियों का साथ आना जिम्मेदार सरकार बनाने की बजाए सत्ता हासिल करने का प्रयास है। चौथा कारण, जम्मू कश्मीर की नाजुक सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सुरक्षा बलों के लिए स्थाई और सहयोगात्मक माहौल की जरूरत है।

जम्मू कश्मीर में कल राज्यपाल के फैसले से पहले दिन भर नए गठबंधन की सरकार बनने की सुगबुगाहट चल रही थी। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को लिखी चिट्ठी में नेशनल कान्फ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन के साथ 56 विधायकों होने का दावा किया। लेकिन राज्यपाल सत्यपाल मलिक के फैसले के बाद गठबंधन को बड़ा झटका लगा है और नेशनल कांन्फ्रेंस ने इस फैसले को अलोकतांत्रिक बताया।

वहीं बीजेपी ने पीडीपी, एनसी और कांग्रेस गठबंधन के पीछे की ताकत पाकिस्तान को बताया है। बता दें जम्मू कश्मीर में पीडीपी के 29, बीजेपी 25, नेशनल कान्फ्रेंस 15 और कांग्रेस के 12 विधायक है। वहीं पीपुल्स कान्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने बीजेपी और 18 अन्य विधायकों का समर्थन होने का दावा कर राज्यपाल के सचिव को व्हाटसएप पर मैसेज भी भेजा था। लेकिन रात होते होते सारे दावे धरे के धरे रह गए और विधानसभा भंग हो गई।

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