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न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद की शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अदालत कक्ष संख्या एक में दोनों न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। इसके साथ ही शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की कुल संख्या 28 हो गयी, जबकि तीन पद अब भी खाली हैं। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत होने से पहले न्यायमूर्ति माहेश्वरी कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति खन्ना दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे।

इन दोनों न्यायाधीशों को पदोन्नत किये जाने के कॉलेजियम के फैसले का कड़ा विरोध भी हुआ था। इसे लेकर कुछ कानूनविदों और न्यायविदों ने आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा था कि न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता वाले पांच-सदस्यीय कॉलेजियम ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग की अनदेखी की है।

इसे लेकर अधिवक्ताओं की सर्वोच्च संस्था भारतीय विधिज्ञ परिषद और विभिन्न अधिवक्ता संगठनों ने भी कॉलेजियम के इस बाबत गत 10 जनवरी के फैसले पर सवाल खड़े किये थे। इसी बीच विधि एवं न्याय मंत्रालय ने कॉलेजियम की सिफरिश राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पास भेजी थी, जिन्होंने गत 16 जनवरी को उस पर हस्ताक्षर कर दिये।

पंद्रह मई 1958 को जन्मे न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने राजस्थान विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक (प्रतिष्ठा) की डिग्री हासिल की। वह 1980 में जोधपुर विश्वविद्यालय से विधि स्नातक बने तथा आठ मार्च 1981 को वकील के तौर पर पंजीकृत हुए। न्यायमूर्ति माहेश्वरी 13 फरवरी 2018 को कर्नाटक उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले 24 फरवरी 2016 से 12 फरवरी 2018 तक मेघालय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे।

न्यायमूर्ति खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को नयी दिल्ली में हुआ था। वह 24 जनवरी 2005 से 17 जनवरी 2019 तक दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

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