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इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश रंग नाथ पांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोमवार को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीशों की नियुक्तियों में भाई-भतीजा और जातिवाद का आरोप लगाया है। जस्टिस पांडेय ने कहा कि नियुक्तियों में कोई निश्चित मापदंड नहीं है, इस समय केवल परिवारवाद और जातिवाद चल रहा है।

उन्होंने पत्र में लिखा, ”न्यायपालिका दुर्भाग्यवश वंशवाद और जातिवाद से ग्रसित है। यहां जजों के परिवार से होना ही अगला न्यायाधीश होना सुनिश्चित करता है। राजनीतिक कार्यकर्ता का मूल्यांकन उसके कार्य के आधार पर चुनावों में जनता के द्वारा किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारी को सेवा में आने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरना होता है।

अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में योग्यता सिद्ध कर ही चयनित होने का अवसर मिलता है। लेकिन हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति का हमारे पास कोई मापदंड नहीं है। प्रचलित कसौटी है तो केवल परिवारवाद और जातिवाद।

प्रधानमंत्री मोदी से कड़ा निर्णय लेने की अपील

पत्र में उन्होंने लिखा है कि 34 साल के सेवाकाल में उन्हें कई बार हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के जजों को देखने का अवसर मिला। उनका विधिक ज्ञान संतोषजनक नहीं है।’ जब सरकार द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक चयन आयोग (एनजेएसी) की स्थापना का प्रयास किया गया तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप मानते हुए असंवैधानिक घोषित कर दिया था। जस्टिस पांडेय ने पिछले 20 साल में हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के विवाद और अन्य मामलों का हवाला देते हुए नरेंद्र मोदी से अपील की है कि न्यायपालिका की गरिमा को पुर्नस्थापित करने के लिए न्याय संगत कठोर निर्णय लिए जाएं।

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