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देश के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज का खर्च महंगा हो सकता है। 10 से 25 रुपये में होने वाले रूटीन टेस्ट के रेट भी बढ़ाए जा सकते हैं। हाल में ही वित्त मंत्रालय ने एम्स को यूजर चार्ज बढ़ाने की बात कही है। जिसके बाद से एम्स ने वित्त मंत्रालय के आदेश पर रिव्यू करना शुरू दिया है। हालांकि संस्थान ने अभी शुल्क बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है।

संस्थान की हाल में हुई बैठक में इस पर चर्चा भी हुई। एम्स के उपनिदेशक वी. श्रीनिवास का कहना है कि अभी वर्तमान शुल्क पर विचार किया जा रहा है। अलग-अलग विभागों के रिव्यू के बाद ही फैसला लिया जाएगा। एम्स में 1996 के बाद इलाज और जांच के शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। श्रीनिवास ने कहा कि एम्स मरीजों को कई तरह की छूट देता है, उस छूट की भी समीक्षा की जाएगी। कई मरीज ऐसे भी होते हैं जो यूजर चार्ज भी नहीं देते हैं, ऐसे लोगों से कैसे यूजर चार्ज लिया जाए, इसका भी रिव्यू किया जाएगा।

एम्स की ओर से सरकार से 300 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन की मांग की गई थी। जिसके बाद वित्त मंत्रालय की ओर एम्स में पर्ची बनवाने से लेकर जांच के लिए तमाम तरह के यूजर चार्ज बढ़ाने की सलाह दी। यह कोई पहला मौका नहीं है जब एम्स में शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा हो। इससे पहले भी वर्ष 2005 और 2010 में आय को बढ़ाने के लिए अल्ट्रासाउंड , रेडियोग्राफी और खून जैसी जांच पर चार्ज बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन राजनीतिक विरोध के बाद इस फैसले को वापस ले लिया गया। 2010 में एम्स ने यूजर चार्जेज बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन विरोध के बाद यह संभव नहीं हो पाया था।

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