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आजादी के बाद से भारत के अलग अलग हिस्सों में घुसपैठिए घर बनाए हुए हैं। पड़ोसी देशों से घुसपैठिए भारत में अवैध तरीके से दाखिल तो हुए लेकिन लौटकर अपने वतन नहीं गए। लगातार इनकी संख्या बढ़ती चली गई। अब ये घुसपैठिए भारत से जाने को तैयार नहीं हैं। बांग्लादेश हो या म्यांमार जहां से घुसपैठिए भारत में आए वहां की सरकारें भी इन्हें अपनाने को तैयार नहीं हैं। 70 सालों से अब तक लाखों की संख्या में घुसपैठिए भारत में आए और यहीं बस गए।

मोदी सरकार आने के बाद उन घुसपैठियों की पहचान की जा रही है जिन लोगों ने अपना देश छोड़कर भारत को ठिकाना बना लिया है। असम में एनआरसी लागू कर इसकी शुरुआत हो गई है। असम में 19 लाख घुसपैठिओं की पहचान हुई है। कुछ कमियों को दूर कर घुसपैठिओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब दूसरे राज्यों में भी एनआरसी लगाने की शुरुआत हो गई है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी घुसपैठिओं को भगाने के लिए, उनकी पहचान के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका है।

सरकार अब अवैध तरीके से रह रहे लोगों की पहचान कर यूपी से बाहर निकालने की योजना पर काम शुरू कर रही है। प्रशासन ने मसौदा सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भेज दिया है। उस आदेश में कहा गया है कि जिले में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, रोड किनारे और उसके आसपास बसी नई बस्तियों की पहचान की जाए। बस्तियों में रह रहे लोगों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाए और उनके फिंगर प्रिंट लेकर डेटा बेस तैयार किया जाए।

एनआरसी पर आर-पार

अब पश्चिम बंगाल में भी एनआरसी को लेकर सियासत तेज है। एक तरफ बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि वो किसी भी हाल में एनआरसी लागू नहीं करेंगी। वहीं बीजेपी कह रही है कि हम किसी भी हाल में घुसपैठियों को भारत की धरती पर नहीं रहने देंगे। पश्चिम बंगाल में काफी घुसपैठिए रह रहे हैं। इसे लेकर सियासत भी तेज है।

कोलकाता में अमित शाह ने कहा कि हम एनआरसी ला रहे हैं, उसके बाद हिंदुस्तान में एक भी घुसपैठिए को रहने नहीं देंगे। उन्हें चुन-चुनकर देश से बाहर करेंगे। बीजेपी सरकार एनआरसी के पहले सिटिजन अमेंडमेंट बिल लाने वाली है, इस बिल के आने के बाद भारत में जितने भी हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई शरणार्थी आए हैं। उन्हें हमेशा के लिए भारत की नागरिकता दी जाने वाली है। यानी केंद्र सरकार ने अपना इरादा साफ कर दिया है कि भारत में रह रहे शरणार्थियों को हम छेड़ेंगे नहीं। घुसपैठिओं को किसी भी हाल में छोड़ेंगे नहीं।

अब सवाल है कि सालों से रह रहे घुसपैठिए अब भारत की भाषा और रहन सहन में इतने घूल मिल गये हैं कि सबके बारे में पता करना मुश्किल है। कैसे पता चलेगा कि ये देश के हैं और ये दूसरे देश से आए हैं। असम में घुसपैठिओं की पहचान को लेकर सवाल उठे थे। सवाल ये भी है कि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री एनआरसी लागू करने को तैयार हैं।

-राजेश कुमार

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