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टीन शेड के नीचे पढ़ते देश के भविष्य का ये तस्वीरें रुद्रप्रयाग की हैं। कहने को ये स्कूल सरकारी है लेकिन यहां की व्यवस्था भी सरकारी फाइलों में दम तोड़ रही हैं। रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से 11 किमी दूर हाईस्कूल गान्धारी ये है। जहां छात्र-छात्रायें विद्युत और जल संस्थान की घोर उदासीनता के चलते जर्जर टीन शेडों में अपना भविष्य बनाने के लिये जद्दोजहद कर रहे हैं। सरकारी कुव्यवस्था के साथ ही बच्चों को प्रकृति की मार भी झेलनी पड़ती है। भयंकर गर्मी के साथ ही बारिश का कोप झेलने को मजबूर हैं। प्रधानाचार्य उत्तम सिंह चौधरी भी सरकार के रुख से त्रस्त हैं।

बना दिया बिना कमरे का हाई स्कूल, प्रैक्टिकल की पूछिये ही मत
पूर्व की सरकार ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए बिना भवन निर्माण के वर्ष 2011 में इस राजकीय जूनियर हाईस्कूल को उच्चीकृत स्कूल का दर्जा दे दिया। ऐसे में गांधारी हाईस्कूल की कक्षाएं अन्य विद्यालय में संचालित की जा रही है। यहां भी स्थिति बदतर है। कक्षा 9 की क्लास जर्जर टीन शेड में संचालित होती है तो कक्षा 10 के छात्र खस्ताहाल कमरे में पढ़ रहे हैं। विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रैक्टिकल के लिये लैब तक नहीं हैं। ऐसे में विद्यालय के कार्यालय की व्यवस्था के बारे में पूछना ही बेकार है।

पानीबिजली कनेक्शन बिना नया भवन एक साल से तैयार
विडंबना तो ये है कि विद्यालय का नया भवन 74 लाख की लागत से एक साल से बनकर खड़ा है। लोक निर्माण विभाग ने स्कूल में बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग को 19 मार्च 2018 को साढ़े 56 हजार रूपये दे चुकी है। ग्राम प्रधान प्रेम सिंह बुटोला बताते हैं कि उन्होंने विद्युत और जल विभाग को कई पत्र भेजे, लेकिन दोनों विभागों का निकम्मा रवैया कायम है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता इन्द्रजीत बोस के पास इसका कोई जवाब नहीं है।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय कब लेंगे सुध ?
इससे तो यही साबित होता है कि सूबे में सत्ता बदल गई लेकिन सरकारी विभागों का नकारापन नहीं बदला। सूबे के शिक्षा विभाग से लेकर अन्य सभी जिम्मेदार विभागों को बच्चों के लगातार बर्बाद होते भविष्य की कोई चिंता नहीं है। ऐसे में किसी मंत्र का जाप करा लीजिये कुछ नहीं होने वाला।

                                                                                                               ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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