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सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने आज अयोध्या मामले की सुनवाई की। पीठ का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने किया जिसमें न्यायमूर्ति एसए बोबडे, एसए नजीर, अशोक भूषण और डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे।

मध्यस्थता समिति ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जजों को सौंपी। तीन सदस्यों वाली मध्यस्थता समिति ने अदालत से और समय मांगा ताकि इस मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके। जिसके बाद अदालत ने उन्हें 15 अगस्त तक का समय दे दिया।

बता दें पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने तीन सदस्यों वाली एक मध्यस्थता समिति का गठन किया था। जिसकी अध्यक्षता अदालत के पूर्व जज जस्टिस एफएम आई कलीफुल्ला कर रहे हैं। आठ मार्च को उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता समिति को आठ हफ्ते में अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था।

बता दें कि इससे पहले 8 मार्च को अयोध्या की भूमि पर मालिकाना हक के मामले को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की इजाजत दी थी। मध्यस्थों की कमेटी में जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्ला, वकील श्रीराम पंचू और आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर शामिल हैं। इस कमेटी के चेयरमैन जस्टिस खलीफुल्ला हैं।

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