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मराठा आरक्षण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट से महाराष्ट्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से मराठा समुदाय को शिक्षा और नौकरियों में दिए गए आरक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि ये आरक्षण पूर्व प्रभावी तौर पर लागू नहीं किया जाएगा।

दरअसल याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि सरकार ने 2014 से पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ आरक्षण नीति को अधिसूचित किया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा समुदाय को दिए गए आरक्षण को बरकरार रखा है, लेकिन राज्य विधानसभा द्वारा निर्धारित आरक्षण की मात्रा 16% से घटाकर 12-13% कर दी है।

महाराष्ट्र में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 64-65% आरक्षण है, तमिलनाडु के बाद ये दूसरा है, जहां 69% है। 27 जून को बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के रूप में वर्गीकृत करके राज्य सरकार द्वारा समुदाय को दिया गया आरक्षण मान्य है।

अदालत के आदेश के आधार पर सरकारी नौकरियों में भर्ती में 13 फीसदी और शैक्षणिक संस्थानों में सभी सीटों के 12 फीसदी पदों को समुदाय के लिए आरक्षित किया गया है।

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