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योध्या मामले को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी के सदस्य मंगलवार को अयोध्या पहुंच चुके हैं। आज (13 मार्च) से इस मामले पर सुनवाई शुरू हो रही है और मध्यस्थता की मदद से कई सालों से अटके इस विवाद को हल करने की कोशिश की जाएगी।

आज बातचीत के लिए 25 लोगों को बुलाया गया है। अवध यूनिवर्सिटी के इंजिनियरिंग कैंपस स्थित गेस्ट हाउस में कमेटी के ठहरने का इंतजाम किया गया हैं कमेटी के सदस्यों के रुकने और मध्यस्थता के लिए अलग-अलग कमरे बने हैं।

वहीं कमेटी के सदस्य श्री श्री रवि शंकर, रिटायर्ड जस्टिस कलीफुल्ला और वकील श्रीराम पंचू शुक्रवार तक अयोध्या में रहेंगे। अयोध्या में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है। छावनी के रूप में तब्दील कर दिया गया है। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पुलिस फोर्स तैनात की गई है। किसी को भी वहां जाने की इजाजत नहीं होगी।  यहां तक कि जिस ऑडिटोरियम में सुनवाई रखी गई है, वहां सिर्फ वही लोग जा सकेंगे जिन्हें मध्यस्थता के लिए बुलाया गया है। सदस्यों से मिलने और बातचीत का यह सिलसिला अगले तीन दिनों तक जारी रहेगा।

जिला प्रशासन ने अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर दी है। सूत्रों की मानें तो मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों के बीच जो भी बातचीत होगी, उसके पॉइंटर टाइप किए जाएंगे। इसके लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के टाइपिस्ट भी यहां मौजूद रहेंगे।

आपको बता दें की इससे पहले मंगलवार को ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद राबे हसनी नदवी, महासचिव मौलाना वली रहमानी की मौजूदगी में लखनऊ के नदवा कालेज में हुई बोर्ड की बाबरी मस्जिद से संबंधित कमेटी की बैठक हुई।

इस बैठक में बोर्ड नेतृत्व ने इस मामले पर अपना रुख एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि विवाद पर बोर्ड का जो रुख पहले रहा है, आज भी वह उस पर कायम है। उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

बैठक में अयोध्या विवाद में प्रमुख मुस्लिम पक्षकार उ.प्र.सुन्नी सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी, इकबाल अंसारी, महबूब अली और मुस्लिम पक्ष से प्रमुख वकील जफरयाब जीलानी, शमशाद अहमद, फुजैल अय्यूबी आदि भी शामिल हुए।

इस दौरान ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि अयोध्या मसले को लेकर गठित तीन सदस्यीय मध्यस्थ पैनल में शामिल आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर अयोध्या विवाद पर पहले अपना रुख स्पष्ट करें।

 

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