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उन्नाव में रेप पीड़िता के मामले पर गुरुवार (12 अप्रैल) को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान यूपी सरकार के महाधिवक्ता ने सरकार का पक्ष रखा। उन्नाव रेप मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के तलब करने के बाद यूपी सरकार के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने सरकार की तरफ से कहा कि 20 जून 2017 को दर्ज सामूहिक रेप केस में तीन नामित आरोपियों की गिरफ्तारी की गयी थी जो अभी जमानत पर हैं और इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। महाधिवक्ता ने कहा कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ SIT ने प्रारम्भिक जांच कर रिपोर्ट के आधार पर 11 अप्रैल 20118 को FIR दर्ज की है और SIT ने अभी विवेचना शुरू नहीं की है। उऩ्होंने कहा कि पीड़ित का बयान दर्ज कर कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। राज्य सरकार ने कहा कि विधायक के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं है और जैसे ही पर्याप्त सबूत मिलेंगे कार्रवाई होगी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रुख पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि पीड़ित मुख्यमंत्री के आवास पर आत्महत्या की कोशिश करती है। पीड़ित के पिता को आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार कर लिया जाता है और मारपीट के बाद कस्टडी में मौत हो जाती है कोई कार्रवाई नहीं होती। इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि सीओ, पुलिसवालों और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गयी है, SIT विवेचना कर साक्ष्य पर कार्रवाई करेगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि क्या गंभीर अपराध में विवेचना में साक्ष्य मिलने पर गिरफ्तारी होती है? कोर्ट ने पूछा कि आप विधायक की गिरफ्तारी करेंगे या नहीं? इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की है।

न्याय मित्र जी.एस चतुर्वेदी ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने 11 अप्रैल को इस मामले में जी.एस चतुर्वेदी के ही पत्र का संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार से जवाब तलब किया था। चीफ जस्टिस डीबी भोंसले और जस्टिस सुनीत कुमार की डिवीजन बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही है। तमाम दलिलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुक्षित रख लिया और अब शुक्रवार (13 अप्रैल) को दो बजे फैसला सुनाया जाएगा।

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