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कोरोना वायरस की महामारी से पूरी दुनिया त्रस्त है। दुनिया भर में इससे बचने के इंतजाम हो रहे हैं। दुनिया के अधिकांश देशों ने अपने यहां  लॉकडाउन लगा रखा है। ऐसे में इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी, आईआरसी ने एक नई रिपोर्ट में कोरोना पर जनहानि की बड़ी चेतावनी दी है। ब्रिटेन के पूर्व विदेश सचिव डेविड मिलिबैंड की अध्यक्षता वाली इस एजेंसी के मुताबिक, दुनिया के 34 सर्वाधिक गरीब देशों में कोविड-19 वायरस का विनाशकारी प्रभाव होगा। इसके कारण करीब एक अरब लोगों में संक्रमण हो सकता है। 30 लाख लोगों की मौत हो सकती है।

यह प्रसन्नता की बात है कि इन देशों में भारत का नाम नहीं है, लेकिन 7 पड़ोसी देशों में से तीन- पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार शामिल हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान, सीरिया और यमन जैसे देश शामिल हैं। यहां इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी सेवाएं दे रही है।  मिलिबैंड के अनुसार कोरोना को लेकर अब तक काफी कम अनुमान लगाए गए हैं। वास्तविक जनहानि कहीं अधिक होगी। इस महामारी से मुकाबले के लिए गरीब देशों को बहुत कम समय मिला है। वहां बहुत व्यापक स्तर पर विनाश हो सकता है।

हालांकि एक दूसरे रिसर्च में यह दावा किया गया है कि भारत में जुलाई के अंत तक कोरोना का खात्मा हो जाएगा। सिंगापुर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी ऐंड डिजाइन के रिसर्च में दावा किया गया  है कि पूरी  दुनिया से 26नवंबर और अमेरिका से #सितंबर तक कोरोना का पूरी तरह खात्मा हो सकता है। लेकिन भारत में यह 24 मई तक 97%, 15 जून तक 99% और 31जुलाई तक 100 प्रतिशत खत्म हो जाएगा।

आईआरसी ने जिन 34 देशों की स्थितियों का आकलन करके रिपोर्ट बनाई है उनमें ज्यादातर युद्धग्रस्त और शरणार्थियों से प्रभावित देश हैं। इनमें अफ्रीकी और एशियाई देश हैं। ये हैं – अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, बुरुंडी, बुर्किना फासो, कैमरून, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, चाड, कोलम्बिया, कोट डी आइवर, कांगो, अल सल्वाडोर, इथियोपिया, ग्रीस, इराक, जॉर्डन, केन्या, लेबनान, लाइबेरिया, लीबिया, माली, म्यांमार, नाइजर, नाइजीरिया, सिएरा लियोन, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सीरिया, तंजानिया, थाईलैंड, युगांडा, वेनेजुएला और यमन।

नई रिपार्ट के अनुसार हर एक लाख संक्रमित लोगों पर 1.6 मौत होने का आकलन किया गया है। आईआरसी ने कहा है कि –  आने वाले हफ्तों में  तेजी से कदम नहीं उठाए गए तो 50 करोड़  से एक अरब लोग कोरोनोवायरस से संक्रमित हो सकते हैं। 15 से और 32 लाख लोगों की मौत की आशंका है। इसमें स्पष्ट कहा गया है  कि गरीब देशों में शरणार्थी शिविरों में भीड़भाड़ और अभावग्रस्त स्थितियों के कारण बहुत जोखिम है। जैसे बांग्लादेश में कॉक्स बाजार, ग्रीस का मोरिया कैम्प, सीरिया का अल होल कोरोना के निशाने पर है। यहां जगह के हिसाब से लोगों की संख्या बहुत अधिक है। मौजूदा हालात में  गरीब देशों में कोरोनोवायरस का प्रभाव ज्यादा पता नहीं है। क्योंकि वहां पर उस तरह से टेस्टिंग नहीं हो रही जैसी अमीर देशों में हो रही है।

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