दुनिया भर में चीन के वुहान से पैदा हुआ वायरस एक बड़ा सरदर्द बन गया है। दुनिया के तमाम देश चीन को इस वायरस पैदा करने का जिम्मेदार मान रहे हैं। इस कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए अलग-अलग स्तर पर काम चल रहा है। वैक्सीनेशन का काम लगातार जारी है और अलग-अलग राज्यों में टीकाकरण चल रहा है। इस बीच गोवा सरकार ने अपने यहां एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने 18 साल से अधिक उम्र वाले लोगों के लिए एक खास दवाई के इस्तेमाल की मंजूरी दी है, जिसका नाम है Ivermectin।

गोवा सरकार ने अपने यहां 18 साल से अधिक उम्र वाले सभी लोगों के लिए Ivermectin की पांच टैबलेट देने की मंजूरी दी है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे के मुताबिक, इस टैबलेट से लोगों में कोरोना से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी और वायरस का खतरा कम होगा।

गोवा में इस दवाई के 12 MG के टैबलेट हर जिलों, अस्पतालों में उपलब्ध कराए जाएंगे। Ivermectin एक एंटी-पैरास्टिक दवाई है, जिसे भारत में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा मंजूरी दी गई है। इस दवाई का इस्तेमाल मुख्य रूप से डॉक्टरों की सलाह पर किया जाता है, जो किसी तरह के संक्रमण को रोकने का काम करती है। अधिकतर ये दवाई उन मरीजों को दी जाती है, जो कि strongyloidiasis और onchocerciasis का सामना कर रहे हैं।

ऐसे में सवाल ये है कि कोरोना से ये दवाई आपको कैसे बचाएगी। एक स्टडी के मुताबिक, Ivermectin किसी भी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण फैलने से बचा सकती है। अमेरिका में मई-जून में इसको लेकर एक स्टडी पब्लिश हुई थी, उसके बाद से कई वैज्ञानिकों ने इस दवाई और कोरोना संक्रमण के कनेक्शन पर अध्ययन किया है। अमेरिकी जर्नल आफ थेरपटिक्स के मई-जून अंक में प्रकाशित यह शोध क्लिनिकल, टेस्ट ट्यूब, जानवरों और वास्तविक जीवन में लिए गए आंकड़ों की व्यापक समीक्षा पर आधारित है।

फ्रंट लाइन कोविड क्रिटिकल केयर अलायंस (एफएलसीसीसी) के प्रेसिडेंट और चीफ मेडिकल आफीसर पियरे कोरी ने बताया कि हमने कोरोना की रोकथाम और उपचार के लिए आइवरमेक्टिन पर उपलब्ध आंकड़ों की सबसे व्यापक समीक्षा की। दरअसल कोरी के नेतृत्व में ही एक दल ने इस इस दवा पर शोध किया है। आइवरमेक्टिन दवा परजीवी संक्रमण का इलाज करने के लिए ली जाती है। यह सामान्य गोलियों की तरह पानी के साथ ली जा सकती है।

इस दवा का अध्ययन का जनवरी 2021 में उपलब्ध 27 नियंत्रित परीक्षणों पर आधारित है। इनमें से 15 नियंत्रित परीक्षणों का चयन रैंडमली किया गया था। शोधकर्ताओं ने कोरोना मरीजों पर इस दवा का अध्ययन करने के दौरान उनके ठीक होने की अवधि, मृत्यृ की संभावना और संक्रमण के असर के सभी पहलुओं को गहराई से समझने की कोशिश की।

कोरोना की रोकथाम में आइवरमेक्टिन की प्रभावकारिता (एफीकेसी) का मूल्यांकन करने के लिए लगभग 2,500 रोगियों पर तरह-तरह के परीक्षण कर उनसे मिले डाटा का विश्लेषण किया गया।

यूके, इटली, स्पेन, जापान के एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि इस दवाई के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों में रिकवरी की क्षमता बढ़ती है, मरने वालों की संख्या में कमी आई है।हालांकि, इसकी सुरक्षा को लेकर अभी भी कई तरह के सवाल खड़े होते आए हैं। FDA का कहना है कि बड़ी मात्रा में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए

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