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शहर हो या गांव इस वक्त सभी महंगाई और बेरोजगारी की चपेट में हैं। सब्जियों के भाव हो या पेट्रोल-डीजल के भाव, नोटबंदी की मार हो या जीएसटी का असर, आए दिन हम सब इनके बारे में पढ़ते रहते हैं। इन सभी खबरों के बीच एक राहत की खबर भी मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी योजना में से एक जनधन योजना का एक सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। इसका दावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की इकॉनिक रिसर्च विंग ने किया है। उन्होंने एक रिपोर्ट में कहा कि, जनधन खाता खोलने से ग्रामीण इलाकों में न केवल महंगाई कम हुई है बल्कि लोगों के पैसे भी बचे हैं। साथ ही शराब और तंबाकू जैसी चीजों की बिक्री में कमी आई है।

हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ग्रुप चीफ इकनॉमिक एडवाइजर सौम्या कांति घोष ने एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें बताया है कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत जिन इलाकों में खाते बड़ी संख्या में खोले गए हैं, उनमें शराब और तंबाकू जैसी चीजों की बिक्री में कमी आई है। रिपोर्ट में खुदरा मुद्रास्फीति के डेटा का हवाला देते हुए बताया गया है कि जिन राज्यों में ग्रामीण इलाकों में 50 प्रतिशत से ज्यादा जनधन खाते हैं, उन राज्यों में मुद्रास्फीति पर सकारात्मक असर पड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे ग्रामीण इलाकों में मुद्रास्फीति भी धीमी हो सकती है।

हालांकि जिस समय यह योजना लाई गई थी, उस समय ग्रामीण इलाकों में मुद्रास्फीति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। माना जा रहा था कि पैसे का ज्यादा मात्रा में सर्कुलेशन होगा तो मुद्रास्फीति प्रभावित होगी।

घोष के अनुसार ‘इसे लोगों को पैसा खर्च करने के व्यवहार में बदलाव के तौर पर देखा जा सकता है। लोग नोटबंदी के बाद बचत की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।’ रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों में लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी खर्च बढ़ाया है।

जानकारी के मुताबिक बता दें कि नोटबंदी के बाद जनधन खातों में तेजी से इजाफा हुआ है। अब तक ऐसे 30.38 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं। जो कुल जनधन खातों के 75 प्रतिशत हैं। इसमें सर्वाधिक खातों की संख्या उत्तर प्रदेश में है जो 4.7 करोड़ के स्तर पर है। इसके बाद बिहार में 3.2 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 2.9 करोड़ जनधन खाते खुले।

गौरतलब है कि जनधन योजना का शुभारंभ 28 अगस्त 2014 किया गया था, जिसका उद्देश्य देश भर में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना।

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