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देश के लोगों की श्रद्धा के प्रतीक कुंभ मेले को संयुक्त राष्ट्र संघ संस्था यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया है। यूनेस्को के अधीनस्थ संगठन इंटरगर्वनमेंटल कमिटी फोर द सेफगार्डिंग ऑफ इन्टेंजिबल कल्चरल हेरीटेज ने  दक्षिण कोरिया के जेजू में 4-9 दिसंबर तक हुए 12वें सत्र में कुंभ मेले को यूनेस्को प्रतिनिधि सूची में शामिल किया है।

दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला माना जाने वाला कुंभ मेला को सूची में बोत्सवाना, कोलंबिया, वेनेजुएला, मंगोलिया, मोरक्को, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात की चीजों के साथ शामिल किया गया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण संबंधी अंतर सरकारी समिति की बैठक 4 से 9 दिसंबर के बीच हो रही है। योग और नवरोज के बाद पिछले करीब दो वर्षो में इस प्रकार की मान्यता प्राप्त करने वाला कुंभ मेला तीसरा धरोहर है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि समिति के अनुसार यह महोत्सव व्यापक एवं शांतिपूर्ण है और इसका आयोजन भारत के इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में किया जाता है। इस दौरान भारत में पवित्र नदी के किनारे पूजा अर्चना की जाती है। यह धार्मिक महोत्सव सहिष्णुता और समावेशी प्रकृति को प्रदर्शित करता है और इसमें बिना किसी भेदभाव के लोग हिस्सा लेते हैं।

इस मौके पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने ट्वीट किया कि ‘हमारे लिए बेहद गौरव का क्षण है कि यूनेस्को ने कुंभ मेला को मानवता के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के तौर पर जगह दी है।’ उन्होंने कहा, ‘कुंभ मेले को धरती पर श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण जमघट समझा जाता है जिसमें जाति, पंथ या लिंग से इतर लाखों लोग हिस्सा लेते हैं।’

वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुंभ मेले को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में जगह मिलने पर खुशी जाहिर की। मोदी ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि यूनेस्को में कुंभ मेले को जगह मिलना देश के लिए गर्व और खुशी की बात है।

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