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छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी से हाथ मिलाकर कांग्रेस को झटका देने के बाद मायावती कांग्रेस को राजस्थान में भी जोर का झटका देने की तैयारी में है। मायावती राजस्थान में समाजवादी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के साथ हाथ मिलाने की तैयारी में है ।

इससे पहले छत्तीसगढ़ में मायावती ने कांग्रेस के बागी अजीत जोगी के साथ छत्तीसगढ़ में गठबंधन बना लिया। जिसके बाद कांग्रेस ने कहा कि वह राज्य में अकेले चुनाव लड़ेगी। मध्य प्रदेश में भी उन्होंने अब तक 22 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। राजस्थान के प्रभारी और सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि, पार्टी गठबंधन के लिए मायावती के संपर्क में है। जेडीएस और सपा के साथ वामपंथी दलों ने तीसरा मोर्चा बनाया है। बीएसपी के भी इसमें शामिल होने पर हमें खुशी होगी। हम बीएसपी नेतृत्व के संपर्क में हैं। हालांकि बसपा कांग्रेस के साथ भी सीटों के मुद्दे पर संपर्क में है।

छत्तीसगढ़ के उलट जहां कांग्रेस गठबंधन करना चाह रही थी, वहीं राजस्थान में बसपा को साथ लेने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने किसी भी गठबंधन के खिलाफ खुल कर सामने आए, क्योंकि पार्टी राज्य में अधिक आत्मविश्वास से लबरेज है, जहां हर पांच साल पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सत्ता परिवर्तन का इतिहास है।

हालांकि, बसपा के विश्वसनीय सूत्रों ने कहा कि मायावती अभी भी कांग्रेस हाई कमान के संपर्क में हैं और राज्य इकाई के स्टैंड के बावजूद दोनों के बीच गठबंधन पूरी तरह से इनकार नहीं किया गया है। बता दें कि पिछले चुनावों में भी बसपा ने राज्य में गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया था और साल 2013 में 199 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उसने 3 सीटें जीती थी और लगभग 5 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया था।

विश्लेषकों का कहना है कि इन तीनों राज्यों में हुए मौजूदा राजनीतिक परिवर्तनों से पता चलता है कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के लिए बीजेपी विरोधी गठबंधन बनाना आसान नहीं होगा। हवा बदले में गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस पार्टियों के तीसरे मोर्चे की ओर उड़ सकती है।

हरियाणा में भी बसपा- भारतीय राष्ट्रीय लोक दल के साथ आ गई है। हालांकि राज्य में विधानसभा चुनाव आम चुनाव के बाद हैं, पिछले महीने आईएनएलडी अध्यक्ष के साथ मायावती की बैठक साल 2019 के चुनावों के लिए बहुत महत्व रखता है।

एपीएन ब्यूरो

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