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साल 2017 भारत की टैक्स नीति के लिए बेहद अहम रहा है। जहां एक ओर इस साल जीएसटी को लागू किया गया। वहीं दूसरी ओर इसमें कई बदलाव भी किए गए। अब मोदी सरकार नए साल में आम आदमी के साथ देश की अर्थव्यवस्था को राहत देने का काम करेगी। मोदी सरकार ने जीएसटी के तहत आम आदमी को राहत देने के लिए कई  उत्पादों का रेट घटाया। कारोबारियों के लिए भी रिफंड क्लेम करने का काम आसान कर दिया गया है।

पीएम मोदी नए साल में जीएसटी आम आमी के साथ देश की अर्थव्यवस्था को राहत देने का काम करेगी। अगले साल जहां जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना तय माना जा रहा है। वहीं, अर्थव्यवस्था के नये साल में जीएसटी के साइड इफेक्ट से उभरने की उम्मीद भी जताई जा रही है। हम आपको बताने जा रहे है कि नये साल में जीएसटी आपके लिए क्या तोहफे लाने की तैयारी में है।

नये साल में जीएसटी जनता को सस्ते पेट्रोल और डीजल का तोहफा दे सकती है। गुरुवार को बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी ने भी इस ओर संकेत‍ किया। इस साल पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने के लिए ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आवाज उठाई थी। इन नेताओं ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों पर लगाम कसने के लिए जीएसटी ही एकमात्र रास्ता है। सुशील मोदी का कहना है कि अगले साल बिजली भी जीएसटी के दायरे में आ सकती है।

1.अगर जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल कर ही लेगी, तो आपको एक लीटर पेट्रोल करीब 45 रुपये में मिल सकेगा। डीजल की कीमत भी इसके आसपास रहने की संभावना है. दरअसल जीएसटी के तहत आने से कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर कम किया जा सकेगा।

2.वहीं आम जनता के लिए घर खरीदना भी सस्ता भी हो सकता है।  वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है। सुशील मोदी ने भी इस बात को दोहराया है। जेटली के मुताबिक इससे न सिर्फ आम आदमी को सस्ता घर खरीदने में मदद मिलेगी, बल्क‍ि यह कर चोरी पर भी लगाम कसने में मददगार साबित होगा।

3.आने वाले नये साल में जीएसटी के तहत टैक्स स्लैब को घटाकर सिर्फ दो पर ही सीमित किया जाएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक में मौजूदा 5 टैक्स स्लैब को 2 में ही सीमि‍त किया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिए कि 28 फीसदी टैक्स स्लैब को खत्म किया जा सकता है। इसकी जगह सिर्फ 12 और 18 फीसदी टैक्स स्लैब रखे जा सकते है।

4.जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने में कारोबारियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। अभी भी छोटे कारोबारियों के मन में जीएसटी को लेकर कई उलझने हैं। उन्हें जीएसटी रिटर्न भरने में दिक्कतें सामने आ रही हैं। इन्हीं सभी दिक्कतों का समाधान ढूंढ़ने के लिए सरकार लगातार नई-नई चीजें ला रही है। हाल ही में सरकार ने जीएसटीएन नेटवर्क पर ऑफलाइन टूल जारी किया है।

5.इस ऑफलाइन टूल की मदद से कारोबारी अपने पूरे कारोबार और उस पर  लगने वाले जीएसटी का हिसाब-किताब आसानी से रख सकेंगे। इसके अलावा सरकार लगातार जीएसटी रिटर्न और रिफंड भरने में यूज किए जाने वाले फॉर्म्स भी कम करेगी। जीएसटी रिफंड समेत अन्य प्रक्र‍ियाओं को भी ऑनलाइन किए जाने की योजना है। अगले साल इस मोर्चे पर सरकार तेजी से काम कर सकती है।

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