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वाद-विवाद के संग लोकसभा में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जमकर विपक्षी पार्टीयों पर कटाक्ष साधा। पीएम ने संसद में सभी विपक्षी नेताओं के सवालो का जबाव बखूबी तंज कसते हुए मजाकिए अंदाज में दिया जिसे लेकर विरोधीयों ने इसका जमकर विरोध किया। संबोधन के दौरान उन्होने 1857 की क्रान्ति, भूकंप व कुत्ते शब्द का प्रयोग किया। जिसे लेकर राजनीति गलियारों में काफी चर्चे हो रहे हैं। इसी को साथ सोमवार 06 फरवरी को एपीएन न्यूज़ के ख़ास कार्यक्रम मुद्दा में नोटबंदी पर चुनावी जवाबयूपी में आएंगी किसकी ऑधी के विषय पर चर्चा हुई। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। इन लोगों नरेन्द्र सिंह राणा (बीजेपी प्रवक्ता), ओंकारनाथ सिंह (प्रवक्ता कांग्रेस), यज्ञ दत्त शुक्ला (प्रदेश महासचिव आरएलडी),  मौलाना मुफ्ती समूम कासमी (मुस्लिम धर्मगुरू), के पी दहिया (महासचिव, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति) व गोविंद पंत राजू (सलाहकार संपादक एपीएन न्यूज) शामिल थे।

नरेन्द्र सिंह राणा ने कहा कि विरोधियों को कुछ न कुछ कमियां निकालने का बहाना चाहिए। इस समय कांग्रेस को यह तकलीफ है कि भ्रष्टाचार क्यू नहीं हो रहा। गलत को गलत कहने में कोई संकोच नहीं है संसद में काग्रेंस ने जैसा प्रश्न किया पीएम ने केवल उसका सटीक जवाब दिया। 

ओंकारनाथ सिंह ने कहा कि पीएम से यही उपेक्षा की जा सकती है वह विपक्ष पर कटाक्ष कसेंगे, वह उनका धर्म बनता है। लेकिन जिस प्रकार से उन्होने भूकंप का मजाक बनाया और बाकी सांसदो ने ताल ठोकी वह एक दुविधायुक्त विषय है। लोग परेशान है और आप उसका मजाक बना रहे है। उन्होने नोटबंदी के विषय पर कहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पूरी छानबीन के बाद 51 सौ लोगों को नोटिस भेजी गई है। सरकार बताए कि 51 सौ लोगों के लिए सवा सौ करोड़ नागरीको को क्यों प्रताड़ित किया गया। इसी के साथ चुनावी मुद्दे पर बताया कि यूपी में हमने विकास को लेकर गठबंधन किया। 

यज्ञदत्त शुक्ला ने बताया कि किसी भी प्रधानमंत्री ने इतना स्तर नहीं गिराया जितना की आज पीएम ने गिराया है। हर बात पर मजाक करना, तंज कसना, हंसी उड़ाना यह जितना आज हो रहा है उतना 65 सालों से कभी नहीं हुआ। किसी पीएम ने नही किया। न इनको ग़रीबो, किसानो से मतलब है। हमें जो पेंशन मिल रहा है वह एटीएम से नहीं मिल रहा है। यह क्या ब्लैक मनी है। चुनाव पर उन्होने कहा कि यह हर जगह धर्म-जाति में बाँट कर चुनाव जीतना चाहते हैं।

मौलाना मुफ्ती समूम कासमी का मानना है कि विक्षप में जो नेता की शैली है वह तारीफ लायक नहीं है। पीएम मोदी और अच्छे अंदाज़ में जवाब देते तो अच्छा होता लेकिन उन्होने जैसा को तैसा जवाब दिया। उन्हे भी यह मौका नहीं देना चाहिए था कि कोई और ऊपर उंगली उठाई। लोगो को धर्मो के नाम पर नही बाँटना चाहिए।

गोविन्द पंत राजू ने कहा कि लोकसभा में जो भी कुछ हुआ मुझे नही लगता कि उसका चुनाव पर कोई असर पड़ेगा। चुनाव के पहले दूसरे चरण के मुद्दे तय है। बहुत हद तक जनता भी समझ चुकी है कि उसे किसे मत देना है। हम चीज़ो के विश्लेषण के बजाय अपने-अपने पसंद का विश्लेषण करते है।

के पी दहिया ने बताया कि पश्चिमी यूपी में जाट और मुस्लिम को तोड़ने की सपा और बीजेपी की सोची समझी साजिशा है। इन्होने वोट बैंक के खातिर हम भाईयो को लड़ाने की कोशिश की है। जो इसके जिम्मेदार है जनता इसका आकलन करेगी।

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