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18 सितंबर 2016 को हुए उरी हमले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), आतंकियों के गाइड के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाई है। एनआईए ने पाकिस्तान के दो यूवकों पर हमले में गाइड की तरह काम करने संबंधी केस में क्लोजर रिपोर्ट फाइल की है। जांच एजेंसी ने दोनों यूवकों को रिहा करने का फैसला लिया है। बता दें कि पीओके के फैजल हुसैन अवान और अहसान खुर्शीद पर पिछले साल आर्मी कैंप में हुए हमले में आतंकियों की मदद करने का आरोप था।

21 सितंबर 2016 को अवान और अहसान की गिरफ्तारी की गई थी जब उरी में हुए हमले में 19 भारतीय जवानों की मौत हुई थी। हालांकि, इन दोनों युवाओं की रिहाई के बाद भी उरी हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ जांच जारी रहेगी।

एक अंग्रेजी अख़बार के सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, एनआईए ने क्लोजर रिपोर्ट अदालत में सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं जिस वजह से इन्हें आरोपों से बरी किया जाता है। इनको पाकिस्तान वापस भेजने की तारीख गृह मंत्रालय तय करेगा। सेना को भी इसकी अनौपचारिक सूचना दे दी गई है। जबकि शुरुआत में सेना को बयान देते समय इन दोनों ने खुलासा किया था कि कि उन्हें जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर की ओर से टास्क दिया गया था कि आतंकियों को सीमा पार करवाना है।

अवान और अहसान के परिवार के लिए यह बहुत खुशी की ख़बर है। कुछ मीडिया समूहों का कहना है कि दोनों लड़के अभी नाबालिग हैं और 10वीं के छात्र हैं। अवान (20) ने खुद को गुल अकबर का बेटा और खुर्शीद (19) ने अपने पिता का नाम चौधरी खुर्शीद बताया था। दोनों ने सेना को दिए बयान में उरी के संदिग्ध आतंकियों की तस्वीरें दिखाईं, जिनमें से एक आतंकी की पहचान हफीज अहमद के तौर पर की गई। हफीज मुजफ्फराबाद के धरबंग गांव का रहने वाला है।

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