टेरर फंडिंग मामले में NIA की बड़ी कार्रवाई, जम्मू-कश्मीर में 45 से अधिक जगहों पर छापेमारी

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जम्मू कश्मीर में आतंक पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी आतंक की साजिश के तार खंगालने में जुटी है। NIA ने टेरर फंडिंग मामले में जम्मू-कश्मीर के 14 जिलों में करीब 45 जगहों पर छापेमारी की। इन जिलों में श्रीनगर, पुलवामा, कुपवाड़ा, डोडा किश्तवाड़, रामबन, अनंतनाग बड़गाम, राजौरी और शोपियां  शामिल है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के साथ मिलकर NIA के अधिकारियों ने जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों के घरों को खंगाला। इस संगठन को पाकिस्तान समर्थक और अलगाववादी नीतियों के चलते 2019 में केंद्र सरकार ने बैन कर दिया था। इसके बावजूद यह संगठन जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा है।

NIA ने 10 जुलाई को टेरर फंडिंग मामले में जम्मू-कश्मीर में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस रेड से एक दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर सरकार के 11 कर्मचारियों को आतंकी कनेक्शन होने के चलते नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।

इसमें से दो आरोपी हिज्बुल-मुजाहिदीन सरगना सयैद सलाहुद्दीन के बेटे थे अहमद शकील, शाहिद युसूफ भी कथित रूप से शामिल थे।

हिज्बुल-मुजाहिद्दीन के चार कथित आंतकियों के खिलाफ सबूत मिले थे कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान से पैसे लिए थे। दिल्ली की एक कोर्ट ने इस मामले में चारों आतंकियों पर क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और UAPA के तहत कई चार्ज लगाने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने कहा था कि हिज्बुल ने जम्मू-कश्मीर अफेक्टीज रिलीफ ट्रस्ट नाम से फर्जी ऑर्गेनाइजेशन बनाया था इसका असली मकसद आतंकी गतिविधियों को फंडिंग करना था इस ट्रस्ट से आतंकियों और उनके परिवारों को पैसे दिए जाते हैं।

इससे पहले पिछले शनिवार को भी एनआईए ने आतंक से जुड़े दो मामलों में 15 जगहों पर छापेमारी की थी। गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जमात हेल्थ और एजुकेशन करने के नाम पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के जरिए दुबई और तुर्की जैसे देशों से फंडिंग ले रहा था और उसका इस्तेमाल आतंक के लिए कर रहा था।

गृह मंत्रालय को खुफिया एजेंसियों ने बताया था कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद पत्थरबाजी और आतंकी घटनाओं में कमी आई है और जमात फिर से आतंक फैलाना चाहता था। बताया जा रहा है कि हाल ही में जमात ने नए अलगाववादियों और आतंकियों की भर्ती के लिए एक सीक्रेट मीटिंग भी की थी। जमात-ए-इस्लामी 7 दशकों से भी ज्यादा पुराना संगठन है।

ये जमात-ए-इस्लामी हिंद से अलग संगठन है

1953 में इसने अपना संविधान भी बनाया था

ये अलगाववाद, आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है

जमात-ए-इस्लामी पर तीन बार बैन लग चुका है

1975 में दो सालों के लिए संगठन पर बैन लगा

1990 से 1993 तक भी इस पर प्रतिबंध लगा

मार्च 2019 में केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगाया था

जाहिर है टेरर फंडिंग के जरिए फिर से घाटी को आतंक की आग में झोंकने की पूरी कोशिश हो रही है लेकिन एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हैं और आतंक की हर साजिश को नाकाम किया जा रहा है।

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