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बिहार में कोरोना की रफ्तार कम थी। लेकिन निजामुद्दीन मरकज से लौटे तबलीगी जमात के लोगों ने इसकी रफ्तार बढ़ा दी। बिहार के कुल मरीजों का 40 फीसदी आंकड़ा सिर्फ सिवान में है। यानि एक तरह से ये जिला बिहार का कोरोना हब बन गया है। इस जिले के कुछ गांवों में खाड़ी देशों से वापस आए और जमात में शामिल लोग की संख्या ज्यादा है।

ऐसे में खबर आ रही है कि सिवान के एक पूरे गांव को प्रशासन ने लॉकडाउन कर दिया है। सिवान के Covid-19 मरीजों के  आंकड़ों ने बिहार को चिंता में डाल दिया है।  बिहार के कुल 51 केस में से 20 सिर्फ सिवान के कोरोना पॉजिटिव हैं। सिवान की हालत चीन के वुहान जैसी हो गई है। दरअसल, सिवान में गुरुवार की सुबह मिले 10 कोरोना पॉजिटिव मरीजों ने बिहार में संक्रमण के कुल तादाद को बढ़ाकर 51 कर दिया है। बड़ी बात ये है कि इन 51 लोगों में से 20 तो सिर्फ सिवान के हैं।  उससे भी बड़ी बात ये कि इन 20 में से 9 पॉजिटिव एक ही महिला से संक्रमित हुए हैं और ये लोग एक ही परिवार के हैं। जिस महिला से एक परिवार के 9 सदस्य कोरोना के शिकार हुए वह ओमान से लौटी थी और 7 अप्रैल को इसकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। 10वां शख्स वह है जो 16 मार्च को दुबई से लौटा है। इसकी उम्र 36 साल है। बाकी 9 मरीजों में एक परिवार की क्रमश: 50, 29, 26, 20 और 18 साल की 5 महिलाएं हैं। 30 साल का एक पुरुष, 12-12 साल की दो बच्चियां और 10 साल का एक बच्चा है।

इसके बाद जिले के 4 वे लोग संक्रमित पाए गए जो खाड़ी देशों से बिहार वापस लौटे थे। आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ता गया और 20 तक जा पहुंचा है। लेकिन जिले ने आंकड़ों का रिकॉर्ड बनाकर स्वास्थ्य विभाग का पूरा ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। यही वजह है कि सरकार ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है। NDRF की टीम भी यहां लगातार जागरुकता के लिए मुहिम चला रही है।

हम आपको बता दें कि चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस पहली बार सामने आया था। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित वुहान शहर ही रहा। अब कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे गांव को भुगतनी पड़ रही है। उनकी वजह से सिवान को बिहार का वुहान कहा जा रहा है।

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