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पूरे विश्व में पैर पसार रहे कोराना के वायरस ने जब भारत में दस्तक दी तब इसके संभावित खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पहले पहल भारत में देशवासियों से एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाने की अपील की । देश भर में लोगों को एक जगह भीड़ न लगाने का अनुरोध किया था। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में ही निजामुद्दीन इलाके में अलग अलग मुस्लिम देशों से आए 5000 सुन्नी मुस्लिम प्रतिनिधियों  के एक सम्मेलन को नहीं स्थगित किया गया। जिसका खामियाजा यह हुआ कि इसमें शामिल लोगों के तेजी से कोरोना वायरस से संक्रिमत होने की खबरें आ रही हैं। इस मरकज में शामिल नौ लोगों के मौत की खबर सामने आई है। 200 से अधिक लोग सर्दी –बुखार की शिकायतों के साथ दिल्ली के अलग अलग अस्पतालों  भर्ती हैँ।

इतनी बड़ी मात्रा में जमात में मौजूद लोगों में संक्रमण की पुष्टि से पूरे देश में हड़कंप मच गया है। वहीं केंद्र सरकार जमात में शामिल हुए विदेशी नागरिकों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। वहीं लखनऊ से तीन विदेशी नागरिक जो जमात में शामिल हुए थे पकड़े गए हैं। पुलिस सूत्रों ने ये खुलासा भी किया है कि जमात से छह विदेशी इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने लखनऊ गए थे।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने मंगलवार को बताया सही तरीके से नहीं पता है कि वहां कुल कितने लोग मौजूद थे। अब तक 1033 लोग यहां से निकाले जा चुके हैं। 334 लोगों को  अस्पतालों में भेजा जा चुका है और 700 को क्वारंटीन सेंटर में भेजा गया है। बता दें कि मंगलवार सुबह दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके से आज भी लोगों का शहर के कई अस्पतालों में जांच के लिए जाना जारी है।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि निजामुद्दीन मरकज से छह विदेशी नागरिक लखनऊ के अमीनाबाद के मरकज में इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने गए थे। ये सभी कजकानिस्तान के हैं। निजामुद्दीन मामले में दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर अधिकारियों की बैठक चल रही है। बैठक के बाद मुकदमे का फैसला लिया जाएगा। कई पुलिस अधिकारियों पर लापरवाही बरतने के लिए गाज गिर सकती है।

इस मरकज के लोग उत्तर प्रदेश से भी आए थे। इस बात ने योगी सरकार की चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों से इसमें शामिल लोगों की सूची बनाना को कहा है। साथ ही कहा है कि वे संक्रमितों की पहचान करें।


उत्तर प्रदेश के सरधना नगर के मोहल्ला आजाद नगर की मस्जिद में जो छह जमात के लोग मिले हैं, वह इंडोनेशिया के रहने वाले हैं। जिनकी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पूर्व में भी जांच की जा चुकी है। लेकिन निजामुद्दीन मरकज में यह विदेशी जमात के लोग वहां पर ठहरे थे, जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। शामली के कस्बा झिंझाना में त्रिपुरा से आए तबलीगी जमात के 14 लोगों को दो मकानों में अलग-अलग क्वारंटीन किया गया है। उन्हें 14 दिन तक घर में रहने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम सुबह-शाम उनकी निगरानी कर रही है।

केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार जो विदेशी नागरिक दिल्ली में हुए तबलीगी जमात कार्यक्रम में शामिल हुए थे उन पर कठोर कार्रवाई हो सकती है। दरअसल वीजा नियमों के अनुसार भारत में आकर कोई भी धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकता। ऐसे में जमात में शामिल होना नियमों के खिलाफ है और ऐसे में विदेशियों पर कार्रवाई हो सकती है।

बता दें कि सरकारों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जमात में आए तेलंगाना के छह कोरोना संक्रमित लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इसी के बाद से देश के कई राज्यों की सरकारें उन लोगों की पहचान में लगी हैं जो जमात में आए थे।

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