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अमेरिका की प्रतिष्ठित ‘टाइम’ पत्रिका ने साल 2017 के लिए ‘टाइम पर्सन ऑफ द ईयर’ की घोषणा की है। इस बार ‘टाइम पर्सन ऑफ द ईयर’ कोई व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि एक कैंपेन है। इस बार महिला हिंसा के खिलाफ शुरू हुए ‘मी-टू कैम्पेन’ को 2017 का टाइम ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुना गया है।

मैगजीन ने अमेरिका में पहले कभी हुए यौन शोषण, यौन प्रताड़न या यौन हिंसा का खुलासा करने वाली महिलाओं को इस साल का ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ घोषित किया है। उसने इन्हें ‘द साइलेंस ब्रेकर्स’ नाम दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सूची में दूसरे स्थान पर रहे। उनके बाद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का नाम रहा।

इनके अलावा सऊदी के शाह क्राउन प्रिंस सलमान भी दौड़ में मजबूती से टिके थे। वोटिंग राउंड में प्रिंस सलमान 24% वोट के साथ पहले नंबर पर थे, जबकि मी-टू 6% वोट के साथ दूसरे नंबर पर। लेकिन टाइम के संपादकों की राय शामिल होने के बाद मी-टू ने बाजी मार ली।

महिला हिंसा और शोषण के खिलाफ आवाज उठाते हुए दुनिया भर की महिलाओं ने मी-टू कैम्पेन शुरू किया था। कैम्पेन वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हुआ और करीब 3 करोड़ लोग इससे जुड़े। कैम्पेन के तहत आवाज उठाने वाली महिलाओं को ‘साइलेंस ब्रेकर’ का टाइटल दिया गया था। टाइम पर्सन ऑफ द ईयर चुने जाने की शुरुआत 1927 में हुई थी

आपको बता दें कि अब तक 91 पर्सन ऑफ द ईयर पुरस्कार दिए जा चुके हैं। मी-टू कैम्पेन के साथ 15वीं बार किसी ग्रुप या कैम्पेन को टाइम पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया है। इसके अलावा हर बार किसी व्यक्ति विशेष को टाइम पर्सन चुना गया है।

ऐसे दोबारा जिंदा हुआ मीटू कैंपेन

अमेरिका की सामाजिक कार्यकर्ता टराना बुर्के ने महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के खिलाफ 2006 में आवाज उठाई थी। उस समय बुर्के ने दुनिया भर की महिलाओं से अपील की थी कि अगर वो भी इसकी शिकार हैं, तो शब्द के साथ अभिव्यक्ति करें। 2017 में ये कैंपेन तब चर्चा में आया। जब हॉलीवुड अभिनेत्री एलीसा मिलानो ने खुलासा किया कि दिग्गज प्रोड्यूसर हार्वे वीन्सटीन ने उनका और तमाम अन्य अभिनेत्रियों का यौन उत्पीड़न किया। वीन्सटीन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई।

इस खुलासे से मी-टू कैम्पैन एक बार फिर जिंदा हो गया। दुनिया भर की महिलाओं ने मी-टू शब्द के साथ अपने साथ हुए किसी भी दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई। मी-टू कैम्पेन शुरू होने के 24 घंटे में ही फेसबुक पर इससे जुड़े 1.20 करोड़ पोस्ट और ट्विटर पर 50 लाख ट्वीट किए गए थे। टाइम के एक सर्वे में 82% महिलाओं ने माना था कि मी-टू की वजह से उन्हें शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत मिली।

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