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पाकिस्तान द्वारा पूर्व नौ सैनिक अधिकारी कुलभूषण जाधव को रॉ का एजेंट मानकर फांसी की सजा सुनाए जाने का पूरे भारत में पुरजोर विरोध चल रहा है। राजनेताओं, अभिनेताओं से लेकर भारत के हर नागरिक के मन पाकिस्तान को लेकर काफी गुस्सा है और हरेक नागरिक कुलभूषण को बचाने के लिए अपने स्तर से हर संभव प्रयास कर रहा है। कुलभूषण पर जबरन फांसी का फैसला सुनाने का मामला अब विश्व स्तर का मुद्दा बनते जा रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान के इस फैसले और बुनी गई ‘कहानी’ की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अमेरिका ने कहना है कि कुलभूषण मामले में पाकिस्तान को अपना रवैया ठीक करने की जरुरत है वरना इस फैसले से वैश्विक मंच पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ सकता है।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय में दक्षिण एवं मध्य एशिया ब्यूरो में पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एलिसा एरिस ने कहा, ‘जाधव के मामले में कई अनियमितताएं हैं जिसमें उसे दूतावास पहुंच मुहैया नहीं कराने , कोर्ट मार्शल को लेकर गोपनीयता बरतना, कुलभूषण को वकील मुहैया ना कराना शामिल है। उन्होंने कहा कि मुझे सबसे अधिक हैरानी इस बात की है कि जाधव के मामले की इतनी जल्द सुनवाई हुई और फैसला भी सुना दिया गया जबकि मुंबई हमलावरों के मामले में सुनवाई कितनी बार स्थगित हुई है। एरिस ने कहा, ‘मुंबई मामले की सुनवाई करीब नौ साल से लटकी हुई है।’ वर्तमान समय में एरिस विदेश संबंध परिषद में भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के लिए सीनियर फेलो हैं।

वाशिंगटन स्थित एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया सेंटर के निदेशक भरत गोपालस्वामी का कहना है कि कुलभूषण को दोषी साबित करने के लिए पाकिस्तान के मौजूद सबूत पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से मुकाबले के लिए पाकिस्तान के खिलाफ भारत की आक्रामक कूटनीति के जवाब में पाकिस्तान ने ऐसा काम किया होगा।

प्रतिष्ठित वूडरो विल्सन सेंटर में दक्षिण एशिया मामलों से जुड़े उपनिदेशक व वरिष्ठ एसोसिएट माइकल कुगलमैन ने कहा, ‘यह पूरी कहानी रहस्य एवं अनिश्चितता में डूबी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तान भारत को उसके क्षेत्र में हस्तक्षेप करने की वजह से ऐसा करके भारत को कड़ा संदेश देना चाह रहा है।

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