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सूर्य देव और छठ मैया की उपासना का पर्व शुरू हो चुका है। शनिवार यानी आज शाम अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद रविवार की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ व्रत का पारण होगा। इस अवसर पर हर जगह तालाबों पर विशेष तैयारियां की गई हैं। बता दें कि छठ का त्योहार देश के कई इलाकों में बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है। यह पर्व खास तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में मनाया जाता है। इस दिन सूर्यदेव की विशेष उपासना की जाती है। छठ पूजा के दौरान 36 घंटों तक व्रत रखा जाता है और डूबते हुए और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

सूर्य को अर्घ्य देने के नियम

– अर्घ्य देने के लिए जल में जरा सा दूध मिलाया जाता है, बहुत सारा दूध व्यर्थ न करें।

– टोकरी में फल और ठेकुवा आदि सजाकर सूर्य देव की उपासना करें।

– उपासना और अर्घ्य के बाद आपकी जो भी मनोकामना है, उसे पूरी करने की प्रार्थना करें।

– प्रयास करें कि सूर्य को जब अर्घ्य दे रहे हों, सूर्य का रंग लाल हो।

– इस समय अगर अर्घ्य न दे सकें तो दर्शन करके प्रार्थना करने से भी लाभ होगा।

छठ पर्व की तारीख

31 अक्टूबर- नहाय-खाय

1 नवंबर – खरना

2 नवंबर – शाम का अर्घ्य

3 नवंबर – सुबह का अर्घ्य

पहला अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 2 नवंबर, 06:33 AM

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – 2 नवंबर, 05:36 PM

छठ व्रत पूजन का महत्व

छठ पर्व में छठ मैया की पूजा की जाती है। इन्हें भगवान सूर्यदेव की बहन माना जाता है। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। छठी मैया का ध्यान करते हुए लोग मां गंगा-यमुना या किसी नदी के किनारे इस पूजा को मनाते हैं। जिसमें सूर्य की पूजा अनिवार्य है साथ ही किसी नदी में स्नान करना भी। इस पर्व में पहले दिन घर की साफ सफाई की जाती है। छठ के चार दिनों तक शुद्ध शाकाहारी भोजन किया जाता है। पूरे भक्तिभाव और विधि विधान से छठ व्रत करने वाला व्यक्ति सुखी और साधनसंपन्न होता है। साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी ये व्रत उत्तम माना गया है। इस व्रत को 36 घंटों तक निर्जला रखा जाता है।

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