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कल से यानी 29 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो गई है। आज यानी सोमवार (30 सितंबर) को नवरात्र का दूसरा दिन है। आज मां नव दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। ब्रह्म का मतलब होता है तपस्या और चारिणी मतलब होता है आचरण करना। मां ब्रह्मचारिणी का है इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। छात्रों और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है।

माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। यही वजह है कि उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण है।

नवरात्र के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने कहा, ‘नवरात्रि में आज माता के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा है। कठिन तप से फल प्राप्ति की प्रेरणा देने वाली मां ब्रह्मचारिणी हम सबको अपने संकल्प को पूरा करने की शक्ति प्रदान करें’।


मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले नहा-धोकर साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए उनका चित्र या मूर्ति पूजा के स्थान पर स्थापित करें। उस पर फूल चढ़ाएं दीपक जलाएं और नैवेद्य अर्पण करें। इसके बाद मां दुर्गा की कहानी पढ़ें। इसके बाद नीचे दिए गए मंत्र का 108 बार जप करें

दधानां करपद्याभ्यामक्षमालाकमण्डल।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्माचारिण्यनुत्तमा।

इस विधि से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कई कष्ट दूर हो जाते हैं और मनुष्य की उम्र लंबी होती है। अगर आपकी कुंडली में बुरे ग्रह स्थित हैं तो उनकी स्थिति सुधर जाती है।

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