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1 मई, 2020 के केंद्र सरकार के आदेश के अनुसार कार्यस्थल में आरोग्य सेतु ऐप के अनिवार्य उपयोग के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है।

यह याचिका केरल हाईकोर्ट में लेथा इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग पार्टनर जैक्सन मैथ्यू द्वारा दायर की गई है, जिसमें आरोग्य सेतु ऐप की गोपनीयता और सुरक्षा की जांच करने के साथ साथ इसकी उपयोगिता लिए स्वतंत्र सदस्यों की एक उच्च अधिकारियों की समिति गठित करने की मांग की गई है इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

सार्वजनिक और निजी संगठनों के कर्मचारियों द्वारा आरोग्य सेतु ऐप के अनिवार्य उपयोग की घोषणा करने की मांग को असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के उल्लंघन मानते हुए शमीर पीएस नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने भी याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ता ने निजता के अधिकार के उल्लंघन की जांच करने और उन मापदंडों को ठीक करने के लिए एक दिशा-निर्देश की मांग की है, जिसमें सरकार संपर्क ट्रैकिंग के लिए व्यक्तिगत डेटा का उपयोग करेगी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि इस ऐप की गोपनीयता की नीति पूरी तरह से अस्पष्टता के साथ संदेह मे डूबी हुई है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया है कि कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से इस ऐप का उपयोग करने का निर्देश दिया गया| जिसे अनुच्छेद 21 और 19 (1) (ए) के तहत अपनी पसंद और सहमति के अधिकार तथा किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ में माना था कि आयोजित सहमति से जीवन के अधिकार पर उचित प्रतिबंध सहमति का अधिकार नहीं छीन सकता है।

याचिकाकर्ता ने आगे कहा है कि “डेटा को एकत्र कर के इसका उपयोग किया जाता है परंतु इसकी जानकारी उस व्यक्ति के पास नहीं होती है जिससे यह डेटा लिया गया होता। डेटा का अंतिम विश्लेषण या संश्लेषण और इसका अंतिम उपयोग बिना उसकी सहमती से ऐसी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी किसी व्यक्ति के साथ साझा करते हैं |

याचिकाकर्ता ने अपने उपयोगकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संविधानिक ढांचे पर भी सवाल उठाया है जो वर्तमान मामले में सहमति के बड़े प्रश्न को बलपूर्वक प्राप्त करने का संकेत देता है। जेसा की आधर कार्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बताया था कि व्यक्ति के अनुमती के बिना सरकार कोई डेटा उपयोग नहीं कर सकती है, ठीक उसी प्रकार इस मामले में भी बिना अनुमति के सरकार ना तो डेटा प्रयोग कर सकती है ना ही बलपूर्वक किसी व्यक्ति को इस ऐप को प्रयोग करने को बोल सकती है, क्योंकि इस ऐप में उपयोगकर्ता से जुड़ी संवेदनशील जानकारी होती है|

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि सरकार के आदेश में अस्पष्ट रूप से कार्यस्थल शब्द का इस्तेमाल किया है जिसकी व्याख्या एस्सार टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड में केरल उच्च न्यायालय के फैसले के संदर्भ में की गयी थी। लिमिटेड बनाम केरल राज्य इसमे य़ह बताया गया था कि  “कार्यकर्ता की अवधारणा के अनुसार, या तो उसे एक विनिर्माण प्रक्रिया में नियोजित किया जाना चाहिए या एक निर्माण प्रक्रिया या किसी भी कार्य के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी भी मशीनरी या परिसर की सफाई में जो कि आकस्मिक या विनिर्माण से जुड़ा हुआ है संसाधित करते हैं। ”

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