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सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में  50% अखिल भारतीय कोटा में ओबीसी आरक्षित ग्रेजुएट मेडिकल सीटों के लिए 27% आरक्षण लागू करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई

सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है कि 50% अखिल भारतीय कोटा के पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीट्स में अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 27% आरक्षण को लागू करने के लिए  सरकार को निर्देश दिए जाएं।

पूर्व स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ.अंबुमणि रामदास द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने 13.08.1990 में एक आदेश जारी किया था कि ,  सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों नौकरियों(केंद्रीय और सार्वजनिक उपक्रम) में  27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाएगा ।

तत्पश्चात उक्त सरकारी आदेश को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी, हालाँकि इंद्रा साहनी और अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मे न्यायालय ने भारत सरकार की संवैधानिकता, वैधता और प्रवर्तनीयता को बरकरार रखा था।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि रिपोर्टों के अनुसार, “शैक्षणिक वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय कोटा (AIQ) सीटों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान नहीं किया गया था।

इसके अलावा 2018-19 में, केवल 220 ओबीसी उम्मीदवारों को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया गया था, जबकि उनके पास 7, 982 सीटों में से 2,152 से अधिक का दावा था।

याचिकाकर्ता ने आगे कहा है कि “पिछले कुछ वर्षों में, ऑल इंडिया कोटा के तहत OBC को PG / UG मेडिकल सीटों में आरक्षण से वंचित रखा गया है। इस प्रकार, उन्हें हर साल 3000 सीटों से वंचित किया जाता है जो सामान्य श्रेणी में स्थानांतरित हो जाती हैं। इस वर्तमान प्रवेश वर्ष 2020-21 के दौरान भी, ओबीसी को राज्यों से प्राप्त सीटों के लिए आरक्षण नहीं दिया गया है। ”

याचिकाकर्ता ने केंद्रीय मंत्री ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण लागू करने के बारे में लिखा था, हालांकि मंत्रालय ने जवाब दिया कि यह मुद्दा उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है।

मंत्रालय ने आगे बताया कि मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के बारे में नियम लागू हैं लेकिन ओबीसी कोटा राज्य दर राज्य अलग है, इसलिए केंद्र यह तय नहीं कर पा रहा है कि किसे फॉलो करना है।

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