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देश के आम आदमी पर अभी पेट्रोल और डीजल की मार पड़ने वाली है। वित्त मंत्रालय आम आदमी को अपनी कीमतों में तेजी से राहत दिलाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को कम करने के पक्ष में नहीं है। लेकिन वित्त मंत्रालय चाहता है कि राज्य तेल पर सेल्स टेक्स और वैट में कटौती करें।

पेट्रोल की कीमतें 16 अप्रैल से लगातार 55 महीने के उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल का भाव 74.63 रुपए प्रति लीटर हो गया है। सीरिया में चल रहे संकट की वजह से क्रूड लगातार महंगा हो रहा है जिसकी वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं।

केंद्र सरकार पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगाती है। तेल पर राज्य सेल्स टैक्स या वैट अलग-अलग दर से लगाते हैं। दिल्ली में पैट्रोल पर वैट 15.84 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 9.68 प्रति लीटर है। ऐसे में कंज्यूमर्स पर बोझ कम करने के लिए एक बार फिर से एक्साइज ड्यूटी में कटौती की मांग उठने लगी है। लेकिन वित्त मंत्रालय का मानना है कि यदि सरकार राजकोषीय घाटा कम करने के अपने रास्ते पर अडिग रहती है तो ऐसे में उत्पाद शुल्क में कटौती की सलाह देना उचित नहीं होगा।

सरकार का टारगेट इस वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 3.3 फीसदी का है, पिछले वित्त वर्ष में ये 3.5 फीसदी था। ईंधन पर उत्पाद शुल्क में प्रति रुपए की होने वाली कटौती से सरकार को 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। ग्लोबल रिसर्च फर्म जेपी मॉर्गन की मानें तो  अगर सीरिया में चल रहा तनाव कम नहीं हुआ तो भारत में पेट्रोल 90 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकता है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से आयात करता है और डॉलर में भुगतान करता है। ऐसे में कीमत बढ़ती हैं तो ज्यादा डॉलर देश से बाहर जाएंगे और रुपया कमजोर होगा। इस तरह देश पर दोहरी मार पड़ेगी।

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