राजस्थान में अशोक गहलोत के सामने एक बार फिर अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुलेआम यह बात बोली थी कि उनकी सरकार को गिराने की साजिश हो रही है। उनका डर अब सच होता दीख रहा है। हालांकि तात्कालिक कोई खतरा न होते हुए भी पंचायत चुनाव में मिली हार के बाद राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया है। भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। BTP के दो विधायक लगातार गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे थे। इस साल की शुरुआत में जब विधानसभा में गहलोत सरकार ने अपना बहुमत साबित किया था, तब दोनों विधायकों ने अशोक गहलोत का समर्थन किया था।

हाल ही में राज्य में हुए पंचायत समिति के चुनाव में कांग्रेस को कई सीटों पर नुकसान हुआ है। BTP के विधायकों ने आरोप लगाया था कि चुनावों में कांग्रेस ने उसका साथ नहीं दिया और धोखा दिया। पंचायत चुनाव में 1833 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को 1713 सीटों पर जीत मिली है। इसके अलावा जिला प्रमुख के चुनावों में भी बीजेपी का प्रदर्शन कांग्रेस से काफी बेहतर था।

हालांकि, दो विधायकों के समर्थन वापस लेने से अशोक गहलोत सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि अब कांग्रेस के पास राज्य में बहुमत है। लेकिन कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से अभी गहलोत सरकार के पास 118 हैं। हालांकि, इनमें से कई निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं। गहलोत के सामने पिछले दिनों सचिन पायलच गुट ने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी थी।लगा था सरकार गिर ही जाएगी पर कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप से सरकार बची।

इसके बाद एक बार फिर से बीते दिनों खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आशंका जताई थी कि राज्य में फिर एक बार सरकार गिराने की हलचल शुरू हो गई है। अशोक गहलोत ने ये दावा पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए किया था। अशोक गहलोत के मुताबिक, बीजेपी फिर राजस्थान और महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है।

बता दें कि इस साल की शुरुआत में ही कांग्रेस राजस्थान में दो गुटो में बंट गई थी। सचिन पायलट खफा होकर अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए थे, लंबे वक्त तक चले सियासी ड्रामे के बाद सचिन पायलट माने और वापस आए। लेकिन तब से अबतक सचिन पायलट को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है।

फिलहाल तो गहलोत की कुर्सी के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन डर है कि असंतोष की यह आग भयावह न हो जाए, जो गहलोत सरकार के खात्मे का कारण बने।

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