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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस  रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह और मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी को तलब किया है। अयोध्या पर फैसले की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे हलचल बढ़ती जा रही है। अयोध्या समेत, राजधानी लखनऊ और प्रमुख शहरों में सुरक्षा के मद्देनजर गतिविधियां तेज हो गई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि, 17 नवंबर से पहले सुप्रीम कोर्ट कभी भी अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुना सकता है।

माना जा रहा है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले के पहले तैयारियों का जायजा लेने के लिए यह बैठक बुलाई गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आगामी पर्वों और रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के मद्देनजर प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक योगी ने कहा कि प्रदेश में शान्ति हर हाल में बनाए रखने के लिए अधिकारी पूरी तरह सजग और तत्पर रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। शरारती तत्वों एवं माहौल खराब करने वाले लोगों पर कड़ी नजर रखी जाए।

अयोध्या विवाद पर फैसले को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने गुरुवार को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंडलों एवं जनपदों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को ये निर्देश दिए। उन्होंने अयोध्या सहित प्रदेश के अन्य जनपदों में कानून व्यवस्था की समीक्षा की।

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या के फैसले को देखते हुए सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी की गई है। सभी राज्यों को फैसले को लेकर अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक अतिरिक्त सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय अर्धसैनिक बलों की 40 कंपनियां भेज रहा है। इन 40 कंपनियों में 4000 पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान शामिल होंगे।

दरअसल, अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर खास तौर पर अयोध्या में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। डीजीपी ओपी सिंह के मुताबिक, हजारों संदिग्धों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रख रही है और अगर जरुरत महसूस होती है। तो इंटरनेट सेवाओं को भी रोका जा सकता है। बीते कुछ दिनों में करीब 6 हजार शांति वार्ताएं हुई हैं और पुलिस-प्रशासन के आलाधिकारी 5 हजार 800 धर्मगुरुओं से मिल चुके हैं। सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखने के लिए बैठकों का दौर लगातार जारी है।

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