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2 जी घोटाले के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद जांच एजेंसियों पर कई सवाल उठ रहे हैं कि 7 साल तक की गई जांच के बाद भी वह आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाईं।

यह सवाल और गंभीर तब हो जाते हैं जब फैसला देने वाले जज ओपी सैनी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुझे यह कहने में बिल्कुल कोई हिचकिचाहट नहीं है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोई भी आरोप साबित करने में बुरी तरह से नाकाम रहा है।

जज ओपी सैनी ने क्या-क्या कहा अपने फैसले में ?

  • कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की ओर से पेश किए गए रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नही है जो  आरोपियों के अपराध को साबित करता हो। फिर चाहे वो कट ऑफ डेट के फिक्स करने, पहले आओ पहले पाओ नीति के मैन्युपुलेशन का, ड्यूल टेक्नोलॉजी वाली कंपनियों को स्पेक्ट्रम देने या फिर कलिंगनार टीवी को 200 करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर देने का आरोप हो।
  • इस केस की चार्जशीट ऑफिशियल रिकॉर्ड की मिसरीडिंग, चुनींदा रीडिंग और संदर्भ से परे हट कर की गई रीडिंग पर आधारित है।
  • आरोप पत्र जांच के दौरान गवाहों की तरफ से दी हुई मौखिक गवाही पर आधारित है, जो गवाहों ने कोर्ट में गवाही के दौरान नहीं कहा। अगर गवाहों ने मौखिक तौर पर बयान दिए हैं और वह ऑफिसियल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं तो वह कानून में मान्य नही हैं।
  • आरोप पत्र में रिकॉर्ड किये गए बहुत से तथ्य गलत हैं, मसलन एंट्री फीस के रिवीजन की वित्त सचिव और ट्राई की सिफारिश की बात कहना।
  • जज ओपी सैनी ने कहा  कि पूरी बहस का नतीजा यह है कि मुझे यह कहने में बिल्कुल भी संकोच नही है कि आरोपियों के खिलाफ “कोरियोग्राफ्ड चार्जर्शीट” में रखे गए आरोपों को साबित करने में अभियोजन पक्ष बुरी तरह से नाकाम रहा है।
  • अभियोजन पक्ष ने केस की शुरुआत बड़े उत्साह के साथ की लेकिन जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ता गया अभियोजन पक्ष दिशाहीन हो गया।
  • जज ओपी सैनी ने कहा कि मैं पिछले 7 साल से गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी वह लगातार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कोर्ट में बैठा इस इंतजार में कि कोई कानूनी तौर पर मान्य सबूतों को रखेगा लेकिन सब कुछ बेकार गया। यह दर्शाता है कि हर कोई अफवाह और कयासबाजी से पैदा हुई लोगों की धारणा के मुताबिक जा रहा था, जबकि लोगों की धारणा की अदालती प्रक्रिया में कोई जगह नहीं होती है।
  • मैंने मुक़दमे में अभियोजन पक्ष की दलीलों को उदार दृष्टिकोण से लेने की कोशिश की हालांकि मैं खुद को प्रभावित महसूस नहीं कर पाया। मामले का उच्च प्रोफ़ाइल होना कानूनी साक्ष्य के अभाव में लोगों को दोषी ठहराने का आधार नहीं हो सकता।
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