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दिल्ली पुलिस के धरना प्रदर्शन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। वकील जी एस मणि समेत 3 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट या रिटायर्ड जज की देखरेख में इस मामले की जांच की मांग की है। याचिका में ये भी मांग की गई कि धरना प्रदर्शन करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो। वहीं, दिल्ली पुलिस के धरना प्रदर्शन के मामले में एक और याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल हुई है। ये याचिका वकील प्रदीप कुमार ने दाखिल की है।

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वहीं, तीस हजारी कोर्ट मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर फिलहाल कोई रोक नहीं रहेगी। दिल्ली के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी कि वकीलों और पुलिस के बीच हुए विवाद की मीडिया रिपोर्टिंग को बैन किया जाए। जिस पर कोर्ट ने मीडिया कवरेज रोकने की मांग पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। वकीलों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि मीडिया में उन्हें गुंडा कहा जा रहा है, जो अपमानजनक है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप याचिका हाईकोर्ट में दायर करें।

बुधवार को वकीलों ने रोहिणी, साकेत, पटियाला समेत कई अदालतों में जोरदार प्रदर्शन किया था। रोहिणी कोर्ट में दो वकीलों ने तो खुद पर पेट्रोल डालकर और इमारत पर चढ़कर खुदकुशी की कोशिश की। हिंसा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि गृह मंत्रालय की स्पष्टीकरण की मांग वाली अर्जी का निपटारा कर दिया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से बनाई गई कमेटी ही मामले की जांच जारी रखेगी। कोर्ट ने कहा कि मीडिया रिपोर्टिंग पर कोई रोक नहीं लगेगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि उसने रविवार के आदेश में कहा था कि केवल दो मुकदमा जो उस दिन तक दर्ज हुआ है, उसको लेकर कार्रवाई नहीं होगी। उसके बाद अगर कोई FIR दर्ज हुई है तो उस पर दिल्ली पुलिस कार्रवाई कर सकती है।

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