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CBI जज बृज गोपाल लोया की संदिग्ध मौत के मामला में शुक्रवार (9 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील इंदिरा जय सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले में CrPC की धारा 174 को पूरी तरीके से दरकिनार किया गया है।

सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की तरफ से जज लोया की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कोर्ट मे दी गई और मिसिंग पेपर याचिकाकर्ता को दिया गया। जिसके आधार पर इंदिरा जय सिंह ने कहा कि इसमें जज का नाम गलत लिखा गया जबकि घटना के समय उनके सहयोगी जज मौजूद थे। जज का नाम बृज गोपाल लोया है जबकि उनका नाम बृज मोहन लोया लिखा गया। लोया के नाम को 2016 में सही किया गया। मामले में केस डायरी का जिक्र भी नहीं किया गया। इंदिरा जय सिंह ने कहा कि पुलिस को केस डायरी बनाकर संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजना चाहिए थी। इसके बाद मजिस्ट्रेट आगे की कार्रवाई करने के निर्देश देते। पार्थिव शरीर को जज के परिजनों की जगह उनके चाचा के भाई जो कि खून के रिश्ते में नहीं आते को दिया गया। इंदिरा जय सिंह ने ECG की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसे लेकर विरोधाभास हैं।

इंदिरा जय सिंह ने कहा कि जो भी तथ्य कोर्ट में रखे गए हैं उनमें परिस्थिति जन्य साक्ष्य की कड़ी में खामियां हैं जिसकी वजह से मामले की SIT जांच की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने मामले मे दाखिल जनहित याचिका को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया। महाराष्ट्र सरकार के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि जब चार जजों ने इस मामले में बयान दे दिए हैं तो कोर्ट उन पर भरोसा करे या फिर कहे कि वो झूठ बोल रहे हैं। मामले की सुनवाई सोमवार 12 फरवरी को भी जारी राहेगी।

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