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कर्नाटक के बागी विधायकों ने फिर एक बार सुप्रीम कोर्ट से उपचुनाव को टालने की मांग की है। बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी शुक्रवार को एन वी रमन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष पेश हुए और 15 विधानसभा सीटों पर आगामी 5 दिसम्बर को होने वाले उपचुनाव को स्थगित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि चूंकि, अयोग्य ठहराए गए विधायकों पर अभी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला नहीं सुनाया है और निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के मुताबिक चुनाव 5 दिसम्बर को होगा। अधिसूचना के मुताबिक उम्मीदवार 11 नवम्बर से नामांकन दाखिल कर सकते हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 18 नवम्बर है लेकिन शीर्ष अदालत ने अभी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने पर अभी फैसला नहीं सुनाया है।

रोहतगी ने मांग की कि उनके आवेदन पर बुधवार को सुनवाई की जाए। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसको लेकर अर्जी दाखिल करें, वे इसे देखेंगे। पिछले 25 अक्टूबर को विधायकों की अयोग्यता के मामले पर शीर्ष अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर द्वारा अयोग्य करार दिए गए कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपनी याचिका में अयोग्य ठहराए गए विधायकों ने स्पीकर के फैसले को चुनौती दी थी। तत्कालीन स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों को मौजूदा विधानसभा के पूरे कार्यकाल 2023 तक के लिए अयोग्य करार दिया था। चुनाव आयोग ने इन सीटों पर उपचुनाव घोषित किए हैं। अयोग्य विधायकों का कहना है कि उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही लंबित है। अगर उपचुनाव हुए तो उनकी याचिका निष्प्रभावी हो जाएगी।

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