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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह देश के हर उस जिले में विशेष पॉक्सो कोर्ट बनाएगी जहां 100 से ज्यादा पॉक्सो मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे दो महीने के अंदर शुरू करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने इसको लेकर केंद्र को अगले चार हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। केंद्र सरकार इन अदालतों के गठन में होने वाला खर्च वहन करेगी। बता दें कि इसी महीने बच्चों से रेप की घटनाओं में हो रही वृद्धि पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई।

बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल पॉक्सो कानून में संशोधन की मंजूरी दी थी। इसके तहत दोषी पाए जाने पर फांसी की सजा होगी। पॉक्‍सो एक्‍ट में संशोधन में मंजूरी के साथ ही नाबालिग से रेप मामले में फांसी की सज़ा होगी साथ ही, बच्‍चों के खिलाफ यौन अपराधों में दंड को और भी कठोर बनाने के लिए सख्त उपाय किए हैं।

क्या है पॉक्सो एक्ट?

2012 में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण के लिए पॉक्सो एक्ट बनाया गया था। इस कानून के जरिये नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। ये एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।

इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है। बता दें कि देश भर में लागू होने वाले इस अधिनियम के तहत सभी अपराधों की सुनवाई, एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चे के माता-पिता की मौजूदगी में होती है।

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