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तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुए झगड़े पर सुप्रीम कोर्ट की पहली सख्त टिप्पणी आ गई है। इसमें कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि गलती जरूर दोनों पक्षों की तरफ से हुई होगी। हालांकि, कोर्ट ने यह बात किसी दूसरे मामले पर सुनवाई के दौरान कही है। कोर्ट में उस वक्त ओडिशा में चल रही वकीलों की हड़ताल का मामला सुना जा रहा था।

सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा ने तीस हजारी मामले का जिक्र किया। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ताली एक हाथ से नहीं बजती। कमियां दोनों पक्ष में थी। हमारा चुप रहना ही ठीक है।’ यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने की। इसमें जस्टिस संजय किशन कौल और केएम जोसफ शामिल हैं। कोर्ट में BCI चैयरमैन मनन मिश्रा ने कोर्ट में कहा हमें उम्मीद है कि दो दिनों में इस समस्या का समाधान हो जायेगा।

उधर इस मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि महिला पुलिस अधिकारी से वकीलों के दुर्व्यवहार पर बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया और दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने जवाब मांगा है। महिला आयोग ने पूछा इस मामले में क्या दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है? अगर नही तो क्यों?  क्या इस घटना में किसी की पहचान हुई है? या कोई अब तक क्या करवाई हुई है?

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील अब्दुल रशीद कुरैशी ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिख कर माफी मांगी है। पुलिस कमिश्नर को लिखे अपने पत्र में कहा हैं कि तीस हजारी कोर्ट का जो सीसीटीवी फुटेज मैंने देखा है, उसमें वकीलों ने जो हिंसा की उसे अनदेखा नही किया जा सकता।

वहीं, विवाद के बाद पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिस के धरने पर बैठने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया है। कोर्ट इस मामले पर 12 फरवरी को सुनवाई करेगा

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