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अवैध गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानि कि UAPA में संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनावई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। UAPA Act के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यूएपीए संशोधन के खिलाफ न्यायालय में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि संशोधन मौलिक आधिकारों का उल्लंघन करते हैं और एजेंसियों को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने की शक्ति देते हैं।

कानून में जो बदलाव किए गए हैं, उनके बदलावों को ही याचिका में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि यह कानून संविधान के अनुच्छे 14, 19 और 21 के खिलाफ है। संशोधन को नागरिकों के मौलिक आधिकारों का उल्लंघन है।

अवैध गतिविधियां गतिविधि रोकथाम कानून में हाल ही में हुए संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। बता दें कि संसद से पास किए गए इस कानून के अनुसार केन्द्र सरकार किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी की श्रेणी में डाली सकती है। फिर वह चाहे किसी समूह के साथ जुड़ा हो या नहीं।

अवैध गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA को साल 1967 में ‘भारत की अखंडता तथा संप्रभुता की रक्षा’ के उद्देश्य से पेश किया गया था और इसके तहत किसी शख्स पर ‘आतंकवादी अथवा गैरकानूनी गतिविधियों’ में लिप्तता का संदेह होने पर किसी वारंट के बिना भी तलाशी या गिरफ्तारी की जा सकती है।

इन छापों के दौरान अधिकारी किसी भी सामग्री को ज़ब्त कर सकते हैं। आरोपी को ज़मानत की अर्ज़ी देने का अधिकार नहीं होता, और पुलिस को चार्जशीट दायर करने के लिए 90 के स्थान पर 180 दिन का समय दिया जाता है।

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