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महाराष्ट्र सरकार 21 अक्टूबर तक मुंबई के आरे जंगल में अब और पेड़ नहीं काट सकेगी और न ही वहां दूसरी गतिविधियां कर सकेंगी।सुप्रीम कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट की याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार को पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया और अगली सुनवाई तक वहां यथास्थिति बहाल रखने को कहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से 2,646 पेड़ों को काटने की इजाजत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट में छात्रों की ओर से वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े, महाराष्ट्र सरकार की ओर से तुषार मेहता और मुंबई मेट्रो की ओर से मनिंदर सिंह दलीलें रखी।

Supreme Court

मुंबई के आरे कॉलोनी में पेड़ कटाई मामले में सुनवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए कहा कि कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जब तक एन्वायरन्मेंट बेंच का फैसला नहीं आ जाता, तब तक आरे में यथास्थिति बहाल रखी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसी दौरान सभी प्रदर्शनकारियों की रिहाई का आदेश दिया है। सरकारी वकील के मुताबिक अदालत ने निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई है, सिर्फ पेड़ों की कटाई पर रोक है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता महाराष्ट्र सरकार की ओर से जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की स्पेशल बेंच के सामने पेश हुए। उन्होंने बेंच को बताया कि जरूरत के पेड़ काटे जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से पूछा था कि वहां कितने पेड़ काटे जा चुके हैं, बताएं?

हालांकि, जस्टिस अरुण मिश्रा ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा, ‘हम जो समझ रहे हैं, उसके मुताबिक आरे इलाका नॉन डिवेलपमेंट एरिया है लेकिन इको सेंसटिव इलाका नहीं है।’

वकील गोपाल शंकर नारायण ने SC में कहा कि आरे कॉलोनी को 2012 में फॉरेस्ट लैंड घोषित किया गया था। इस दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने उनसे ग्रीन ज़ोन की जानकारी मांगी। अदालत ने इस दौरान महाराष्ट्र सरकार से हलफनामा मांगा है और मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी है।

छात्रों की ओर से संजय हेगड़े ने कहा कि आरे को जंगल घोषित करने का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पेंडिंग चल रहा है। वरिष्ठ वकील गोपाल ने कहा कि आरे का मसला काफी पुराना है, 1999 में SC ने जंगल की परिभाषा घोषित करने की बात कही थी। लेकिन महाराष्ट्र की ओर से इसपर परिभाषा नहीं दी गई।

महाराष्ट्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर इस क्षेत्र को संवेदनशील माने जाने से इनकार किया है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप नोटिफिकेशन दिखाइए. सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से महाराष्ट्र सरकार का नोटिफिकेशन दिखाने की मांग की, जिसमें आरे कॉलोनी का जिक्र है।

उच्चतम न्यायालय ने लॉ स्टूडेंट्स की ओर से पेड़ों को काटने के विरोध में लिखे पत्र को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए रविवार को स्पेशल बेंच का गठन किया था। मेट्रो शेड के लिए आरे कॉलोनी के पेड़ों की कटाई का विरोध सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता के साथ कई जानी-मानी हस्तियां कर रही हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर एक याचिका में मांग की गई थी कि पूरे आरे एरिया को जंगल घोषित किया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। इसलिए वह इसपर सुनवाई नहीं कर सकता। सरकार ने इस मामले में दो नोटिफिकेशन जारी किए थे। इनमें से एक के जरिए आरे एरिया को इको सेंसटिव जोन से अलग कर दिया गया था। अदालत में सुनवाई से पहले मुंबई मेट्रो की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने मुंबई में करीब 24 हजार पेड़ लगाए हैं, जिनका लगातार ध्यान भी रखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को करेगा।

संजय रमन सिन्हा

 

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