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लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने राजनीतिक ‘मास्टर स्ट्रोक’ मारते हुए नेहरु गांधी परिवार की एक और सदस्य प्रियंका गांधी वाड्रा को सक्रिय राजनीति के मैदान में उतार कर भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सामने एक सशक्त चुनौती पेश की है।

चुनावी सरगर्मियां तेज होते ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी का महासचिव नियुक्त करके उन्हें पूर्वी उत्तरप्रदेश की जिम्मेदारी दे दी। राज्य में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन को देखते हुए पार्टी ने तुरुप का पत्ता चला है। भारतीय राजनीति में कई सालों से यह अटकलें लगायी जा रही थी कि श्रीमती वाड्रा भी सक्रिय राजनीति के मैदान में उतरेंगी। राहुल गांधी ने अपनी बहन को यह जिम्मेदारी देकर इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

इससे पहले प्रियंका गांधी वाड्रा ने पिछले लोकसभा चुनाव में अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार किया था। वह समय समय पर पार्टी की अंदरुनी बैठकों में भाग लेती रही हैं। पार्टी के भीतर से उनको सक्रिय राजनीति में लाने की मांग उठती रही है। इस बीच पार्टी ने वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को महासचिव -संगठन पद से हटा दिया है और यह जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता के सी वेणुगोपाल को सौंपी गयी है।

कांग्रेस ने यहां एक विज्ञप्ति में बताया कि प्रियंका गांधी वाड्रा की नियुक्ति फरवरी के प्रथम सप्ताह से प्रभावी होगी जबकि वेणुगोपाल ने तत्काल पद संभाल लिया है। वह कर्नाटक के मामलों के भी प्रभारी बने रहेंगे।

कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता एवं महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिम उत्तरप्रदेश का प्रभारी बनाया है। उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभावी होगी। पार्टी ने वरिष्ठ नेता और महासचिव गुलाम नबी आजाद को उत्तरप्रदेश से हटाकर हरियाणा के मामलों का प्रभारी बनाया है।

साभार, ईएनसी टाईम्स

 

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