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अयोध्या का इतिहास बहुत ही पुरातन और समृद्ध रहा है। लेकिन बदलते वक्त ने अयोध्या के मुकाबले कई बड़े नगर बसते और उड़ते चले गए। अयोध्या चूंकि भगवान राम की जन्म स्थली है इसलिए हिंदुस्तान के हिंदुओं का स्वाभविक लगाव है, इस शहर से। भारत के सुप्रीम कोर्ट  ने लगभग नौ महीने पहले अयोध्या  में राम मंदिर बनाने के लिए अनुमति दी थी। तब से आज तक अय़ोध्या में हर दिन एक नया आयाम जोड़ जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यहां पर जमीनों के रेट  लगभग तीन गुना हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पहले यहां पर जमीन 900 रुपये प्रति स्क्वॉयर फीट पर आसानी से मिल जाती थी। परंतु अब उसी अयोध्या में प्रॉपर्टी के रेट 1000 से 1500 रुपये प्रति स्क्वॉयरफीट हो गए हैं। अयोध्या के कुछ जगहों पर तो प्रॉपर्टी के रेट 2000 से 3000 रुपये प्रति स्क्वॉयरफीट हो गए हैं। ऐसा तब है कि जब कोरोना वायरस महामारी के चलते भारत के तमाम शहरों में प्रॉपर्टी के दाम गिर गए हैं। वैसे तो प्रापर्टी के रेट तो कोरोना की वजह से आर्थिक गतिविधियों में आई सुस्ती की वजह से पूरी दुनिया में गिरे हैं परंतु अयोध्या में बदले माहौल में आश्चर्यजनक रुप से प्राप्रर्टी की कीमतों में उछाल आया है।

अयोध्या में अगस्त महीने में भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए हुए भूमि पूजन के बाद एक बार फिर से  प्रॉपर्टी  की कीमतों में उछाल आया है। इसके पीछे यदि वजहों को जानने की कोशिश करें तो हम पाएंगे कि इसकी कुछ खास वजहें है। बीते कुछ दशकों से अयोध्या राजनीति का केंद्र है। लोगों का अयोध्या से जुड़ी आस्था बहुत ही प्राचीन है। अयोध्या में राममंदिर निर्माँण की रुकावटें साफ होने के बाद मंदिर निर्माण शुरु होने से पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लंबी लंबी बैठके कर अयोध्या के भविष्य की मजबूत बुनियाद रखने की योजना बनाई।  योगी सरकार ने अपनी ओर से काफी तैयारी की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कई बड़े इन्फ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की घोषणा की। अयोध्या में इंटरनैशनल एयरपोर्ट बनाने, थ्री स्टार होटल और कई इंफ्रास्ट्रक्टर प्रॉजेक्ट की घोषणा की है। योगी सरकार का उद्देश्य है कि अयोध्या को ईसाइ संप्रदाय के वैटिकन सिटी से भी भव्य रुप में बनाने का। लोग अयोध्या को उसकी भव्यता के साथ जानें। अयोध्या के राम मंदिर को इतना खूबसूरत व भव्य लुक दिया जाएगा कि दुनिया के नक़्शे सबसे प्रमुख संरचना के रुप में सामने आए।

सीएम को घोषणा के बाद अचानक अयोध्या में जमीनें खरीदने वालों की संख्या बढ़ गई है। कई कारोबारी निवेश के लिए और अपना प्रॉजेक्ट शुरू करने के लिए जमीनें खरीदना चाहते हैं।  देश के अलग-अलग हिस्सों से तमाम लोग यहां निवेश कर रहे हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने पहले ही कई जमीनों की रजिस्ट्रियां रख ली हैं। कई जमीनों का मालिकाना हक विवादित है। कई प्लॉट सरयू के पास वेडलैंड वाले हैं जिन पर नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल की नजर है। यहां निवेश की इच्छा रखने वाले कुछ लोग संपत्ति वास्तव में धार्मिक उद्देश्य के लिए चाहते हैं। वे चाहते हैं जमीनों पर धर्मशाला, सामुदायिक किचन और जन सुविधाएं मुहैया करवाएं। कई लोग भविष्य के लिहाज से यहां निवेश कर रहे हैं। ख़ास कर मंदिर और सरयू नदी के आसपास ज़मीन की मांग और महंगाई तेज़ी से बढ़ रही है। कई टॉप ब्यूरोक्रेट्स, पुलिस अधिकारी और राजनीतिक लोग अयोध्या में जमीन खरीद रहे हैं। इन बेनामी प्रॉपर्टी खरीदने वालों की भीड़ के कारण भी रेट ज्यादा हो गए हैं।

हालांकि अयोध्या में सरकार भी कई प्रॉजेक्ट शुरू करने के लिए जमीनें अधिग्रहीत कर रही है। कहा जा रहा है कि कई लोग इस कारण भी जमीनें खरीद रहे हैं। वे जमीनों को सरकार को देंगे और उससे उन्हें मुनाफा होगा। हालांकि कई लोग यह नहीं जानते कि यदि नए जमीन के खरीदार वर्तमान सर्कल दरों के अनुसार भुगतान किया जाता है, तो इससे वृद्धि नहीं होगी। ऐसे में उन्हें बड़ा नुकसान होगा।। कुछ लोग जो अयोध्या को उज्जवल भविष्य को देखते हुए प्रापर्टी में निवेश करना चाहते हैं , यदि उनकी उम्मीदों के अनुसार विकास ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो उन्हें भी नुकसान हो सकता है।

बहरहाल, यह स्पष्ट है कि कोरोना वायरस की महामारी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर शून्य से नीचे चली गई है लेकिन अयोध्या की तस्वीर को देखें तो कहानी कुछ और ही मालूम होती है। अयोध्या में ज़मीन ख़रीदना अब आम आदमी के बस की बात नहीं रही। उम्मीद है कि अयोध्या में बढ़ती प्रापर्टी कीमतें आने वाले समय में तात्कालिक बूम साबित ना हों।

अयोध्या फले-फूले और फैले इसी में हम सबका कल्याण है। इन हालातों में हम यही कह सकते हैं….

होइहि सोइ जो राम रचि राखा । को करि तर्क बढ़ावै साखा ॥

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