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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग से लोग अब खुद को झुलसता महसूस कर रहे हैं। आम-आदमी की जेब पर जहां डाका पड़ रहा है। तो वहीं तेल की कमाई से सरकार अपना खजाना भरने में जुटी है। लगातार बढ़ रही कीमतो को लेकर फिलहाल सरकार की ओर से कोई राहत के संकेत नहीं हैं।

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने उत्पाद शुल्क में किसी भी तरह की कटौती से इंकार कर दिया है। साथ ही तर्क दिया है कि कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमत, इस वृद्धि के लिए जिम्मेदार है। आपको याद दिला दें कि ये वही बीजेपी है जिसने विपक्ष में रहते मनमोहन सरकार के दौरान तेल की बढ़ी कीमतों को लेकर हल्ला बोला था और उस तर्क को भी खारिज किया था जिसमें तत्कालीन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव को बढोतरी की वजह बताया था।अब गेंद विपक्ष के पाले में है और कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए 10 सितंबर को भारत बंद का आहवान किया है।

ऐसे में सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि आम जनता तेल के बोझ तले दबती जा रही है।तेल की बढ़ी कीमतें हर दिन नए कीर्तिमान स्थापित करती जा ही है।और सरकार का राहत दने से इंकार, क्या आने वाले दिनों में लोगों की मुसीबत को और बढ़ाने जा रहा है। आखिर सरकार पेट्रो-पदार्थ को GST के दायरे में लाने से क्यों बचना चाहती है।

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