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भारतीय वायुसेना की शक्ति अब और बढ़ गई है, चीन के साथ चल रहे विवाद की बीच भारतीय सेना के बल में इजाफा हुआ है, फ्रांस से भारत के लिए उड़ान भरे 5 राफेल ने आज हरियाणा के अंबाला एयरबेस पर लैंड किया, पांचों लड़ाकू विमानों की लैंडिग के लिए अंबाला में पहले से ही सारी तैयारी की गई थी, यहां पर घारा 144 लागू कर दी गई है, यहां आधिकारिक फोटोग्राफी से अलग फोटो खींचने पर रोक लगा दी गई है। आपको बता दें मंगलवार को राफेल विमानों ने फ्रांस से उड़ान भरी थी, जिसके बाद एक बार हवा में ही उनकी फ्यूलिंग हुई थी फिर पांचों लड़ाकू विमान UAE के अल दाफरा बेस पर रुक थे और बुधवार सुबह सभी विमान भारत के अंबाला के लिए रवाना हुए थे। विमानों के स्वागत के लिए खुद वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया मौजूद रहें

राफेल के भरतीय वायुसेना में शामिल होने पर पीएम मोदी ने संस्कृत में ट्वीट कर लिखा- राष्ट्ररक्षासमं पुण्यं, राष्ट्ररक्षासमं व्रतम्, राष्ट्ररक्षासमं यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च।। नभः स्पृशं दीप्तम्.. स्वागतम्!
इस स्‍लोक का मतलब है- राष्ट्र रक्षा से बढ़कर ना कोई पुण्य है, न कोई व्रत, ना ही कोई यज्ञ है, आकाश के दीप्‍तिमान स्‍वागत है।


रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्विट कर बधाई दी और कहा कि राफेल अंबाला में सुरक्षित लैंड कर चुके हैं। भारत में राफेल लड़ाकू विमानों का आना हमारे सैन्य इतिहास में एक नए युग की शुरुआत है। ये मल्टीरोल विमान भारतीय वायुसेना की क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे।


वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने राफेल विमान का वीडियो शेयर करके लिखा- ” गति से लेकर हथियारों की क्षमताओं तक, राफेल बहुत आगे का है! मुझे यकीन है कि ये विश्व स्तरीय फाइटर जेट एक गेम चेंजर साबित होंगे. मैं इस महत्वपूर्ण दिन पर पीएम नरेंद्र मोदी जी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी, भारतीय वायु सेना और पूरा देश को बधाई देता हूं.

राफेल का स्वादत:-

राफेल के अंबाला में लैंड करते ही इनका स्वागत वाटर सैल्यूट के साथ किया गया, इस दौरान वायुसेना चीफ आरकेएस भदौरिया भी मौजूद रहे। यह पांचों राफेल लड़ाकू विमान एयरफोर्स के 17वें स्क्वॉड्रन में तैनात होंगा। इस स्क्वॉड्रन को गोल्डन एरोज के नाम से जाना जाता है।

कब शुरु हुई थी राफेल डील:-
राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने की पहल स्वर्गीय पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी, भारत को सुरक्षा के मोर्चे पर पड़ोसी देशों से मिल रही चुनौतियों के बीच वाजपेयी सरकार ने 126 लड़ाकू विमानों को खरीदने का प्रस्ताव रखा था, हालांकि इस प्रस्ताव को कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने परवान चढ़ाया, जिसके बाद अगस्त 2007 में यूपीए सरकार में तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी की अगुवाई वाली रक्षा खरीद परिषद ने 126 एयरक्राफ्ट की खरीद को मंजूरी दे दी थी। तब से लेकर अब तक इस डील पर टालमटोल चलता रहा जिसके बाद मोदी सरकार के पहले शासनकाल में ये डील कई विवादो के बाद फाइनल हुई और दूसरे शासनकाल में राफेल को सफलता पूर्वक भारत लाया गया।

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